श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जोधपुर में जी20 रोजगार कार्य समूह की पहली बैठक को संबोधित किया।
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श्री शेखावत ने कहा कि वे इस बैठक के सह-अध्यक्षों, इंडोनेशियाऔर ब्राजील के हमारे सम्मानित सहयोगियों के बहुमूल्य योगदानऔर उत्साहवर्धक शब्दों के लिए आभारी हैं। इस बैठक को सफलबनाने में उनकी सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व महत्वपूर्ण है।

श्री शेखावत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए मेजबानदेश के रूप में, भारत को रोजगार के महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधानकरने में जी20 का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, जो हमारे देशोंऔर हमारे लोगों की समृद्धि और भलाई के लिए बहुत महत्वपूर्णहै। उन्होंने कहा कि जी20 की शुरुआत से ही इसमें हमारी सक्रियभागीदारी वैश्विक सहयोग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और सभी केलिए समृद्ध दुनिया बनाने के हमारे साझा लक्ष्य का प्रमाण है।
श्री शेखावत ने कहा कि दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादीवाले देश के रूप में, भारत का मानना है कि रोजगार के भविष्य कोआकार देने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में इसकीमहत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा मजबूत लोकतंत्र और हमारीविविधता, हमें विभिन्न प्रकार की आवाजों और विचारों को एकसाथ लाने के लिए अद्वितीय परिप्रेक्ष्य एवं शक्ति प्रदान करती है।
श्री शेखावत ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता का विषय,“वसुधैव कुटुम्बकम,” या “एक पृथ्वी, एक परिवार, एकभविष्य” विशेष रूप से उपयुक्त है, क्योंकि हम अपनीअर्थव्यवस्थाओं और अपने लोगों की परस्पर संबद्धता पर चर्चाकरने के लिए एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी साझामानवता और सभी के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिएमिलकर काम करने के महत्व की याद दिलाने के लिए एकशक्तिशाली कारक के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यहइस बात पर भी जोर देता है कि आज हम जिन श्रम और रोजगारचुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान समावेशी, टिकाऊऔर सभी के लिए समान होना चाहिए।

श्री शेखावत ने कहा कि वैश्विक श्रम बाजार के सामने जटिल औरदूरगामी चुनौतियां हैं और केवल सहयोग एवं समन्वय के माध्यम सेही हम सार्थक समाधान खोजने की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंनेकहा कि दुनिया भर में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की मौजूदास्थिति मौजूदा कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई है। उन्होंनेकहा कि कई देशों में महामारी के कारण हुई आर्थिक मंदी केपरिणामस्वरूप बेरोजगारी में अत्यधिक वृद्धि हुई है। कई छोटे औरमध्यम आकार के व्यवसाय विशेष रूप से बुरी तरह प्रभावित हुएहैं, जिससे कई क्षेत्रों में नौकरी खत्म हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, आय असमानता बढ़ी है और गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्यामें वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि कई देशों में, सरकारों को महामारीसे लड़ने के लिए अधिक धन खर्च करना पड़ा है, जिसके कारणअन्य कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए कम धन शेष बचा। इसनेसामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव डाला है। श्रमिकों के लिएआर्थिक प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करने के संदर्भ में कई देशोंद्वारा प्रयास किए गए हैं, लेकिन रोजगार की स्थिति औरसामाजिक सुरक्षा अभी भी चुनौतियों का सामना कर रही है।
श्री शेखावत ने कहा कि महामारी के आर्थिक आघात को कमकरने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने तत्काल राहत सुनिश्चित करनेके लिए कई उपाय किए और अपेक्षाकृत तेजी से अत्यधिकभरपाई भी हो पाई है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक वितरण प्रणालीके माध्यम से भारत ने महामारी के दौरान 800 मिलियन लोगों कोखाद्यान्न वितरित किया और यह योजना आज तक जारी है। इसकेअलावा, दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्यआश्वासन योजना यानी आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्ययोजना के माध्यम से, भारत 500 मिलियन से अधिक लोगों कोस्वास्थ्य कवरेज प्रदान करता है।
श्री शेखावत ने कहा कि 228 बिलियन रुपये के परिव्यय के साथआत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के माध्यम से सामाजिक सुरक्षालाभों के प्रावधान के साथ-साथ रोजगार सृजन के लिएनियोक्ताओं को प्रोत्साहित किया गया। इस योजना के अनुसार, सरकार ने दो साल के लिए 1000 कर्मचारियों तक रोजगार देनेवाले प्रतिष्ठानों में नए कर्मचारियों के संबंध में ईपीएफ के लिए 12 प्रतिशत कर्मचारियों के योगदान और 12 प्रतिशत नियोक्ताओं केयोगदान यानी मजदूरी का 24 प्रतिशत का भुगतान किया है।उन्होंने कहा कि सरकार ने दो साल के लिए 1000 से अधिककर्मचारियों को रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों में नए कर्मचारियों केसंबंध में ईपीएफ अंशदान के कर्मचारियों के हिस्से यानी वेतन का 12 प्रतिशत का भुगतान किया है।
श्री शेखावत ने कहा कि लगभग 3.2 मिलियन स्ट्रीट वेंडर्स कोअपना व्यवसाय फिर से शुरू करने में मदद करने के लिएकोलेटरल फ्री ऋण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि भारत मेंएक व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) शामिल हैं, जो क्रमशः 277 मिलियन और 131 मिलियन से अधिक लाभार्थियों को सेवा प्रदान करते हैं।
श्री शेखावत ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धनयोजना शुरू की है, जो असंगठित श्रमिकों के लिए सरकार केअंशदान से वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करती है। ई-श्रम पोर्टलअसंगठित श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए लॉन्चकिया गया था, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म इकोनॉमी वर्कर्स शामिलहैं। अब तक 400 से अधिक व्यवसायों में 290 मिलियन सेअधिक श्रमिकों को पंजीकृत किया गया है।
श्री शेखावत ने कहा कि सरकार ने स्टैंडअप इंडिया, स्किल इंडियाऔर मेक इन इंडिया जैसे स्किलिंग के क्षेत्र में पहल की है औरनौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के लिए रोजगार सेवाएं प्रदानकरने के लिए नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) परियोजना कोलागू कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा हैकि अब तक राष्ट्रीय कैरियर सेवा के तहत 10 मिलियन से अधिकरिक्तियां निकाली गई हैं। एनसीएस पोर्टल रोजगार प्राप्त करने केप्रति इच्छुक अपने पंजीकृत लोगों के लिए माइक्रोसॉफ्ट औरटीसीएस द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम भी उपलब्ध करता है।
श्री शेखावत ने कहा कि हम अपनी चर्चा शुरू करने के साथ ही, सभी को याद दिलाना चाहते हैं कि हम यहां केवल समस्याओं केबारे में बात करने के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं, बल्कि ऐसेसमाधान खोजने के लिए उपस्थित हुए हैं, जो दुनिया भर के लोगोंके जीवन में सुधार ला सकें। उन्होंने कहा कि हमने इन मामलों परकुछ सबसे प्रतिभाशाली और जानकार विशेषज्ञों को इकट्ठा कियाहै, और उन्हें विश्वास है कि साथ मिलकर हम उन मुद्दों को हलकरने में वास्तविक प्रगति कर सकते हैं, जो हमारे राष्ट्रों की आर्थिकऔर सामाजिक भलाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
श्री शेखावत ने उद्घाटन सत्र के बाद पहले एम्प्लॉयमेंट वर्किंग ग्रुपके बारे में मीडिया को जानकारी दी।
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