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बेंगलुरु में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की पहली बैठक से पहले अभिनव, सहनीय, समावेशी विकास और कुशल शासन के लिए ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ विषय पर उच्च स्तरीय संगोष्ठी।

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भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की पहली बैठक की पृष्ठभूमि में, ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ (डीपीआई) विषय पर एक उच्च स्तरीय संगोष्ठी कल बेंगलुरु, भारत में आयोजित की गई।संगोष्ठी में केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन, डॉ. मुलानी इंद्रावती, वित्त मंत्री, इंडोनेशिया गणराज्य,श्री रॉबर्टो डी ओलिवेरा कैंपोस नेटो, गवर्नर, सेंट्रल बैंक ऑफ ब्राजील, सुश्री क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, प्रबंध निदेशक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और श्री अगस्टिन कारस्टेंस, महाप्रबंधक, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स ने भाग लिया, जिसमें अभिनव, सहनीय, समावेशी विकास और कुशल शासन के लिए डीपीआई विषय पर पैनल चर्चा हुई।

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श्री अजय सेठ, सचिव, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार और भारत के जी20 वित्त उप-अधिकारी ने प्रतिष्ठित पैनल विशेषज्ञों का स्वागत किया। आर्थिक परिवर्तन, वित्तीय समावेश और विकास के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर भारत के जी20 टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष तथा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पूर्व अध्यक्ष, श्री नंदन नीलेकणि द्वारा परिचर्चा का संचालन किया गया।

संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए, श्री सेठ ने कहा कि कैसे डिजिटल नवाचार अंतर को समाप्त करने वाले माध्यम और विकास के समर्थक के रूप में उभरा है और भारत सहित विभिन्न देशों के अनुभवों से स्पष्ट है कि डीपीआई सर्वाधिक परिवर्तनकारी डिजिटल नवाचारों में से एक है।

श्री नीलेकणी ने डीपीआई की भूमिकाओं तथा उदाहरणों को स्पष्ट किया और कहा कि डीपीआई का उपयोग करके सामाजिक और सेवा प्रदान करने संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए एक नया दृष्टिकोण विकसित करने से जुड़ी भारत की सफलता की कहानी सामने आयी, जिससे सरकारों के लिए धन की बचत हुई एवं वित्त और नवाचारों तक पहुंच के प्रोत्साहन से पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि हुई।

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पैनल विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों की चर्चा की और आसान पहुंच, समावेश, जवाबदेही और उत्पादकता लाभ के माध्यम से लोगों के विकास और सशक्तिकरण के लिए डीपीआई की क्षमता को स्पष्ट किया। पैनल विशेषज्ञों ने विशेष रूप से महामारी के दौरान सरकारी और निजी क्षेत्र की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच का विस्तार करने के लिए डीपीआई के योगदान को रेखांकित किया।

भारत की जी20 अध्यक्षता के माध्यम से समावेशी विकास और प्रगति के लिए डीपीआई का लाभ उठाने को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। संगोष्ठी में परिचर्चाओं ने अभिवाव, सहनीय और समावेशी विकास के लिए कुशल शासन के एक साधन के रूप में डीपीआई की क्षमता पर प्रकाश डाला।

इस प्राथमिकता के तहत काम में तेजी लाने के लिए, भारत की जी20 अध्यक्षता द्वारा आर्थिक परिवर्तन, वित्तीय समावेश और विकास के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। टास्क फोर्स की सह-अध्यक्षता भारत के जी20 शेरपा श्री अमिताभ कांत और श्री नीलेकणी द्वारा की जाती है और इसका गठन भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान कार्य मार्गदर्शन के लिए किया गया है।

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