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जी-20 के दूसरे कार्यकारी समूह के वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और क्षेत्रीय डायग्नोस्टिक उत्पादन में तेजी लाने के लिए मजबूत सहयोग के लिए आह्वान से पूर्व मुख्य हित धारकों की बैठक का आयोजन।

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जी-20 को-ब्रांडेड कार्यक्रम का संचालन औषध विभाग, एफआईएनडी और यूनिटेड के द्वारा दीर्घकालीन विकास और गुणवत्ता-पूर्ण, सस्ते, प्रभावी, निदानात्मक उपायों के उत्पादन के प्रयास पर चर्चा के लिए किया गया।

  • भारत की मेजबानी में आयोजित इस बैठक के उद्देश्यों से हेल्थ वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष को अवगत कराया गया।
  • अनुसंधान विकास और डायग्नोस्टिक उत्पादन इकाइयों के स्थापना के संबंध में इस मीटिंग की अनुशंसा से जी-20 और इसके सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों आदि को अवगत कराया गया। 17 से 19 अप्रैल को गोवा में होने वाली जी-20 के दूसरे कार्यकारी समूह की बैठक से पहले औषध विभाग, एफआईएनडी और यूनिटेड ने प्रभावी गुणवत्तापूर्ण और सस्ते डायग्नोस्टिक उपायों के उत्पादन हेतु सहयोग में मजबूती लाने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।  इस बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा जी-20 के सदस्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, रूस, ब्राजील और ऑब्जर्वर के रूप में मॉरीशस, नीदरलैंड और ओमान) सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और दुनिया भर के 20 डायग्नोस्टिक उत्पादकों ने भाग लिया।

इस बैठक का उद्घाटन करते हुए औषध विभाग की सचिव सुश्री एस. अपर्णा  ने कहा- निदानात्मक उपचारों का महत्व महामारी में जांच से कहीं अधिक और महत्वपूर्ण है। निदान  बीमारियों की बेहतर रोकथाम और उपचार की कुंजी है। बृहद रूप से यह वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) को प्राप्त करने का उपाय है। भारत सरकार गुणवत्तापूर्ण, सस्ते डायग्नोस्टिक को सबकी पहुंच में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा हमें उम्मीद है कि आज के विचार को दूसरी हेल्थ वर्किंग कमेटी अपने कल की बैठक में आगे बढ़ाएगी।

नैदानिक उत्पादों की विकेंद्रीकृत और क्षेत्रीय अनुसंधान पर आधारित उत्पादन की उपलब्धता से असमानताओं को खत्म कर महामारी की रोकथाम, उससे निबटने की तैयारी और जवाबी क्षमता में विकास कर, स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देकर, वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज में सहयोग कर, क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी मदद करेगा।

एफआईएनडी के उपाध्यक्ष श्री संजय सरीन ने कहा महामारी से विकेंद्रीकृत डायग्नोस्टिक उपायों के विकास को बल मिला है। डायग्नोस्टिक उपकरणों के  एक ऐसे मॉडल जो  अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर न केवल समान गुणवत्ता वाले हों, बल्कि टिकाऊ और समान रूप से सबके लिए उपलब्ध हों। जी-20 के प्राथमिकताओं के अनुसार हमें विश्वास है कि डायग्नोस्टिक के विकेंद्रीकृत उत्पादन से हमें डायग्नोस्टिक की उपलब्धता और बढ़ाने और वैश्विक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ाने के बृहत मिशन में सफलता मिलेगी।

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इस बैठक का आयोजन 13-14 अप्रैल को भारत में एफआईएनडीऔर यूनिटेड द्वारा किया गया, जिसमें 13 देशों के बीस डायग्नोस्टिक उत्पादकों ने भाग लिया। इस कार्यशाला में मध्यम और निम्न आय वाले देशों में डायग्नोस्टिक के विकास उत्पादन और व्यवसायीकरण तथा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसके क्षेत्रीय उत्पादन पर केंद्रित था। बैठक ने डायग्नोस्टिक उत्पादन कर्ताओं को विकेंद्रीकृत और टिकाऊ डायग्नोस्टिक के अनुसंधान और उत्पादन में सहायक अवयवों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया।

इस कार्यशाला के परिणाम स्वरूप डायग्नोस्टिक उत्पादकों ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, तकनीकी आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण में साझेदारी हेतु अपनी दिलचस्पी दिखाई है।  उत्पादकों ने देशों से  राष्ट्रीय डायग्नोस्टिक रणनीति विकसित करने की जरूरत पर भी बल दिया है।  इसके साथ ही इसके लिए देशों में बजट निर्माण, खरीद-फरोख्त की नीति, जिसमें क्षेत्रीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का जांच में प्रमुखता से इस्तेमाल हो, की भी वकालत की है। उन्होंने सरकार और उत्पादकों के लगातार मजबूत होती साझेदारी की जरूरत पर बल भी दिया है। जिसमें क्षेत्रीय उत्पाद को फास्ट ट्रैक नियामकों  की सुविधा देने की प्रतिबद्धता हो।

अंतिम रूप से भारत के जी-20 के अध्यक्षीय लक्ष्य के रूप में यह स्वीकार किया गया कि वैश्विक समन्वित उत्पादन, अनुसंधान और तकनीकी हस्तांतरण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया जाए। यूनिटेड  के प्रोग्राम निदेशक रॉबर्ट मतिरु ने कहा समस्या स्पष्ट है अब यह जरूरी है कि समान रूप से सबको मूलभूत स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी जिसमें डायग्नोस्टिक शामिल है, की उपलब्धता के लिए हमें कड़े कदम उठाने होंगे। यूनिटेड  में हम सब क्षेत्रीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित दृष्टिकोण अपनाने को प्रतिबद्ध हैं। हम अपने सहयोगियों के साथ वैश्विक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बनाने के लिए हर समस्या पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

आज की बैठक में डायग्नोस्टिक उद्योग के सहयोगियों को अपनी अनुशंसा जी-20 सदस्य राज्यों तक पहुंचाने के अवसर मिलेगा। जिससे जी-20 के दूसरी स्वास्थ्य कार्यकारी समूह की बैठक में उस पर विचार किया जा सके। इस बैठक में दवा क्षेत्र में मजबूत सहयोग जिससे सुरक्षित, गुणवत्ता पूर्ण, प्रभावी और सस्ते चिकित्सीय उपायों डायग्नोस्टिक और निदानों को उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी गई।

इस बैठक का समापन सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक श्री राजीव बहल ने किया। उन्होंने कहा डायग्नोस्टिक की जरूरत बहुत ज्यादा है। अब जबकि हम दूसरी कार्यकारी समूह के बैठक करने जा रहे हैं।  जी-20 के सदस्य देशों को डायग्नोस्टिक के सहयोगी अनुसंधान और उत्पादन में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है जो क्षेत्रीय रूप से उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं, क्षमताओं और मानव संसाधन में मौजूद चुनौतियों का सामना कर सके।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय’ के अंतर्गत ‘औषधि विभाग’ भारत में औसत क्षेत्र के विकास और कई जटिल समस्याओं पर जैसे कि दवाइयों की उचित दर पर उपलब्धता, अनुसंधान, बौद्धिक संपदा अधिकार कानून और दवा क्षेत्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं जो इस मंत्रालय को अन्य मंत्रालय से एकीकृत होकर काम करने की जरूरत पर जोर देती है। विभाग का उद्देश्य गुणवत्ता-पूर्ण दवाइयों को उचित मूल्य पर उपलब्ध करवा कर भारत को विश्व का सबसे बड़ा गुणवत्ता-पूर्ण दवा प्रदाता देश बनाना है। ज्यादा जानकारी के लिए https://pharmaceuticals.gov.in/ का अवलोकन करें।  

एफआईएनडी विश्व में विश्वसनीय और न्यायसंगत डायग्नोस्टिक की पहुँच सुनिश्चित करना चाहता है । हम  देशों, निवेशकों, निर्णय लेने वालों और स्वास्थ्य प्रदाताओं को एक साथ  जोड़ कर डायग्नोस्टिक अनुसंधान में जांच को टिकाऊ स्वास्थ्य का जरूरी अंग बनाना चाहते हैं।  हम लोगों की पहुंच में गुणवत्तापूर्ण डायग्नोसिस को लाकर एक मिलियन जीवन की रक्षा करना चाहते हैं और स्वास्थ्य देखभाल की दर में गिरावट लाकर मरीजों और स्वास्थ्य संरक्षण पर एक बिलियन यूएस डॉलर की बचत करना चाहते हैं।

यूनिटेड एक वैश्विक स्वास्थ्य संगठन है जो बीमारियों के खोज और जांच में डायग्नोस्टिक में नई समाधान की खोज करता है। जो रोग का निम्न और मध्यम आय वाले देशों में त्वरित, सस्ता और प्रभावी समाधान ढूंढ सके। इसके कार्यों में बड़े और गंभीर रोग जैसे एचआईवी, मलेरिया, टीवी और एडवांस एचआईवी, सर्वाइकल कैंसर जैसे रोगों के लिए अनुदान अनुसंधान उपलब्ध कराना भी है।  हाल ही में यूनिटेड ने कोविड-19  के निदान में चिकित्सीय विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है। एक्सीलेटर के प्रदाता के रूप में मुख्य एजेंसी  के रुप में भी उभरा है। यूनिटेड की नई रणनीति 2023-2027 में एक वैश्विक रूप से स्वास्थ्य एमरजेंसी  के समय में हस्तक्षेप कर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में बदलाव लाने के लिए निवेश करना है। यूनिटेड विश्व स्वास्थ्य संगठन की मेजबानी में काम करता है ज्यादा जानकारी के लिए www.unitaid.org देखें।

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