नमस्कार हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 97826 56423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , चारण समाज की एकता देखकर मन बहुत हर्षित हुआ : देवल बाईसा – Raj News Live

Raj News Live

Latest Online Breaking News

चारण समाज की एकता देखकर मन बहुत हर्षित हुआ : देवल बाईसा

😊 Please Share This News 😊

बाड़मेर  ।सौराष्ट्र से पांच दिवसीय देवियां दर्शन यात्रा के दौरान महात्मा इशरदास चारण छात्रावास बाड़मेर के माँ करणी मन्दिर प्रांगण में देवल बाईसा ने कहा कि चारण समाज में एकता को देखकर मेरा मन बहुत खुश हुआ है । धरती पर ईश्वर ने क्रोध, द्वेष भावना के लिए नहीं भेजा है आपको । आप देवी-देवताओं की औलाद देवी पुत्र है, देवताओं के वंशज हैं, इस बात पर कभी गौर करें की लोग आपको देवीपुत्र के नाम पर जानते हैं। आप जब अपने घर परिवार में साफ़ सफाई रखते हैं, लेकिन अपने मन मन्दिर माँ करणी के मन्दिर और छात्रावास की साफ़ सफाई करने से ही शिक्षा का मन्दिर चमक उठेगा और भविष्य में उन्नति के हजारों द्वार खुले मिलेगें l मनुष्य जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन होता है, जबकि संगठित होने पर उसमें शक्तियां आ जाती है। संगठन की शक्ति से मनुष्य बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर सकता हैं।                                संगठन में ही मनुष्य की सभी समस्याओं का हल है। जो परिवार और समाज संगठित होता है, वहां हमेशा खुशियां और शांति बनी रहती है । ऐसा देश तरक्की के नित नए सोपान तय करता है। इसके विपरीत जो परिवार और समाज असंगठित होता है, वहां आए दिन किसी न किसी बात पर कलह, झगड़े होते रहती है । जिससे वहां हमेशा अशांति का माहौल बना रहता है।संगठित परिवार, समाज और देश का कोई भी बड़े से बड़ा दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ सकता, जबकि असंगठित होने पर दुश्मन जब चाहे आप पर हावी हो सकता है। संगठन का प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व होता है, जबकि बिखराव किसी भी क्षेत्र में अच्छा नहीं होता है। संगठन का मार्ग ही मनुष्य की विजय का सच्चा मार्ग है। यदि मनुष्य किसी गलत उद्देश्य के लिए संगठित हो रहा है तो ऐसा संगठन हमारे लिए अभिशाप है, जबकि किसी अच्छे कार्यों के लिए संगठन वरदान साबित होता है। प्रत्येक धर्म ग्रंथ संगठन और एकता का संदेश देते हैं। कोई भी धर्म आपस में बैर करना नहीं सिखाता है। सभी धर्मों में कहा गया है कि मनुष्य को परस्पर प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना चाहिए। मनुष्य जब एकमत होकर कार्य करता है तो संपन्नता और प्रगति को प्राप्त करता है। संगठन में प्रत्येक व्यक्ति का विशेष महत्व होता है इसलिए जब मनुष्य संगठित होकर कोई कार्य करता है तो उसके परिणाम में विविधता देखने को मिलती है। जिस तरह प्रत्येक फूल अपनी-अपनी विशेषता और विविधता से किसी बगीचे को सुंदर व आकर्षित बना देते हैं उसी तरह मनुष्य भी अपनी-अपनी विशेषता और योग्यता से किसी भी कार्य को नया आयाम प्रदान कर सकते हैं। यह भी संभव नहीं है कि किसी विषय पर सभी व्यक्तियों का मत एक जैसा ही हो, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति किसी विषय या समस्या को अपने नजरिये से ही देखता है और इसी आधार पर उसका समाधान भी खोजता है, लेकिन जब बात संगठन की आती है तब मनुष्य को वही करना चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा हमारे समाज के लोगों का भला हो। संगठन में प्रत्येक मनुष्य को अपनी व्यक्तिगत भावनाओं पर नियंत्रण करना होता है इसलिए संगठन में व्यक्ति को शारीरिक तौर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक व बौद्धिक रूप से भी समर्पित होना पड़ता है। साभार:-माणकमल भंडारी

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]
error: Content is protected !!