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डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक बचत पर ‘हर घर जल’ कार्यक्रम के महत्वपूर्ण प्रभाव पर प्रकाश डालती है।

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“हम जीवन बचाने, महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनानेऔर जीवन को आसान बनाने में योगदान देने में सुरक्षित पेयजलकी भूमिका देख रहे हैं”। डॉ. वी के पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीतिआयोग ने आज यहां भारत में ‘हर घर जल’ कार्यक्रम के पर्याप्तलाभों पर प्रकाश डालते हुए डब्ल्यूएचओ की ग्राउंडब्रेकिंग रिपोर्टके लॉन्च के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा, “किसी भी कार्यक्रम का व्यक्तियों और परिवारों के जीवन मेंशारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सुधार पर इस तरह कासीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।” डॉ. पॉल ने कार्यक्रम की गति औरपैमाने की सराहना की और कहा, “हर सेकंड एक नया कनेक्शनजोड़ा जा रहा है जो आज भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य को बदलरहा है।”रिपोर्ट का अनुमान है कि देश में सभी घरों के लिए सुरक्षित रूप सेप्रबंधित पेयजल सुनिश्चित करने से अतिसार रोगों से होने वालीलगभग 400,000 मौतों को टाला जा सकता है और इन बीमारियोंसे संबंधित लगभग 14 मिलियन विकलांगता समायोजित जीवनवर्ष (डीएएलवाई) को रोका जा सकता है। अकेले इस उपलब्धि सेअनुमानित लागत में $101 बिलियन तक की बचत होगी। यहविश्लेषण डायरिया से होने वाली बीमारियों पर केंद्रित है क्योंकिपानी से होने वाली बीमारियां इसके लिए बड़ा कारण है।इस मौके पर श्रीमती विनी महाजन, सचिव, पेयजल और स्वच्छताविभाग, जल शक्ति मंत्रालय, और डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, महानिदेशक, भारतीय चिकित्साअनुसंधान परिषद, डॉ. रोडेरिको एच. ओफ्रिन, डब्ल्यूएचओ केभारत के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

 

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ.बहल ने नागरिकों को स्वच्छपेयजल उपलब्ध कराने में हर घर जल की उपलब्धि की सराहनाकी। उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन में भारत सरकार के निवेशका स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण गुणक प्रभाव पड़ता है, जैसा कि इसअध्ययन से पता चला है।” ‘हर घर जल’ रिपोर्ट डायरिया संबंधी बीमारियों पर ध्यान केंद्रितकरती है क्योंकि वे पानी, सफाई और स्वच्छता (वॉश) मुद्दों सेसंबंधित समग्र रोग के बोझ में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।विश्लेषण इन बीमारियों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता औरसार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण में पर्याप्त लाभ कीसंभावना को रेखांकित करता है। 2019 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति चुनौतीपूर्णथी। रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018 में, भारत की कुल आबादीका 36 प्रतिशत, जिसमें 44 प्रतिशत ग्रामीण आबादी शामिल है, के पास अपने परिसर में बेहतर पेयजल स्रोतों तक पहुंच नहीं थी।असुरक्षित पेयजल के प्रत्यक्ष उपयोग के गंभीर स्वास्थ्य औरसामाजिक परिणाम हुए। विश्लेषण इंगित करता है कि 2019 में, असुरक्षित पेयजल, अपर्याप्त सफाई और स्वच्छता के साथ, वैश्विकस्तर पर 1.4 मिलियन मौतों और 74 मिलियन डीएएलवाई मेंयोगदान दिया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) विभिन्न सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संकेतकों की निगरानी करता है, जिसमें सुरक्षित रूपसे प्रबंधित पेयजल सेवाओं (संकेतक 6.1.1) और असुरक्षितपानी, सफाई और स्वच्छता से संबंधित मृत्यु दर (संकेतक 3.9.2) का उपयोग करने वाली आबादी का अनुपात शामिल है। डब्ल्यूएचओ ने पानी, सफाई और स्वच्छता में सुधार से जुड़ेस्वास्थ्य लाभों का अनुमान लगाने के लिए तरीके और उपकरणविकसित किए हैं, विशेष रूप से डायरिया संबंधी बीमारियों औरअन्य संबंधित स्वास्थ्य परिणामों को कम करने में।

रिपोर्ट नल के पानी के प्रावधान के माध्यम से महिलाओं औरलड़कियों के लिए बचाए गए जबरदस्त समय और प्रयास पर जोरदेती है। 2018 में, भारत में महिलाओं ने घरेलू जरूरतों को पूराकरने के लिए रोजाना औसतन 45.5 मिनट पानी इकट्ठा करने मेंखर्च किया। कुल मिलाकर, जिन घरों में ऑन-प्रिमाइसेस पानी नहींहै, वे हर दिन पानी इकट्ठा करने में चौंका देने वाले 66.6 मिलियनघंटे खर्च करते हैं, जिनमें से अधिकांश (55.8 मिलियन घंटे) ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं। नल के पानी के प्रावधान के माध्यम सेसार्वभौमिक कवरेज के परिणामस्वरूप दैनिक जल संग्रह प्रयासोंकी आवश्यकता को समाप्त करके पर्याप्त बचत होगी।

घोषणा के दौरान, डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्रीमती विनी महाजन नेजल जीवन मिशन की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंनेकहा कि ग्रामीण नल जल कनेक्शन 2019 में 16.64 प्रतिशत सेबढ़कर 41 महीने की अवधि के भीतर 62.84 प्रतिशत हो गए, जोकि मात्र 0.23 प्रतिशत प्रति वर्ष की तुलना में 13.5 प्रतिशत कीऔसत वार्षिक वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है।

हर घर जल‘ कार्यक्रम के बारे में:

जल शक्ति मंत्रालय के तहत जल जीवन मिशन द्वारा कार्यान्वित हरघर जल कार्यक्रम की घोषणा 15 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येकग्रामीण परिवार को पर्याप्त आपूर्ति के लिए सस्ती और नियमितपहुंच प्रदान करना है। नलों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल की।सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल सेवाओं के लिए एसडीजी 6.1 पर प्रगति की निगरानी के लिए कार्यक्रम के घटक जल आपूर्ति, सफाई और स्वच्छता के लिए डबल्यूएचओ/ यूनिसेफ के संयुक्तनिगरानी कार्यक्रम के साथ संरेखित हैं।

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