जी20 में भारत की अध्यक्षता।
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डॉ. मांडविया ने चिकित्सा संबंधी उपायों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जी20 देशों के रूप में हमें विशेष रूप से एलएमआईसी और एलआईसी पर ध्यान केंद्रित करते हुए न्यायसंगत चिकित्सा उपायों की पहुंच व उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वैश्विक सहयोग और साझेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जी20 सदस्य देशों के रूप में यह हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि हम न्यूनतम सामान्य विभाजक का लाभ उठाकर “न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद” तैयार करें। डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता ने “नेटवर्क के नेटवर्क” दृष्टिकोण को अपनाते हुए एक वैश्विक चिकित्सा प्रति-उपाय समन्वय तंत्र बनाने के लिए जी7 देशों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और जोहान्सबर्ग प्रक्रियाओं सहित अन्य मंचों के साथ तालमेल में इस एजेंडे को प्राथमिकता दी है।

डॉ. मनसुख मांडविया ने दोहराया, कोविड-19 महामारी ने इस सत्य को उजागर कर दिया है कि दुनिया को किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल के प्रबंधन के उद्देश्य से एक समन्वित रणनीति की आवश्यकता है और विशेष रूप से जरूरतमंद लोगों के लिए तर्कसंगत तरीके से न्यायसंगत चिकित्सा उपायों की पहुंच व उपलब्धता की सुविधा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव सबसे बड़ा खतरा है, मानवता जिसका वर्तमान में सामना कर रही है और इसका स्वास्थ्य प्रणालियों पर गहराई से असर पड़ रहा है। डॉ. मांडविया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एशियाई विकास बैंक इस प्रभाव को कम करने के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के ढांचे के भीतर जलवायु का लचीलापन लाने पर काम करने के लिए पर्यावरण और स्वास्थ्य पहल की शुरुआत भी करेगा।

डॉ. घेब्रेयेसस ने इस अवसर पर कहा कि टीकों, उपचार और अन्य स्वास्थ्य उत्पादों ने कोविड-19 महामारी से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मौजूदा अंतराल को पाटना जरूरी है और इसीलिए एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है, जो जीवन रक्षक उपकरणों तक पहुंच को सक्षम बना दे। डॉ. घेब्रेयेसस ने कहा कि जब हम संगठित होकर काम करते हैं तो हम सशक्त होते हैं।
सम्मेलन के अंतिम दिन में दूसरे सत्र के दौरान विश्व बैंक की डिजिटल-इन-हेल्थ: अनलॉकिंग द वैल्यू फॉर एवरीवन नामक रिपोर्ट जारी की गई। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य डेटा के सरल डिजिटलीकरण से लेकर स्वास्थ्य प्रणालियों में डिजिटल प्रौद्योगिकी को पूरी तरह से एकीकृत करने तक विचार करने का एक नया तरीका प्रस्तुत करती है। यह स्वास्थ्य वित्तपोषण, सेवा वितरण, निदान, चिकित्सा शिक्षा, महामारी से निपटने की तैयारी, जलवायु एवं स्वास्थ्य प्रयासों, पोषण और बढ़ती आयु के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों को शामिल करने पर केंद्रित है।
वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय पहले संयुक्त सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री सुश्री निर्मला सीतारमन और डॉ. मनसुख मांडविया ने की। बैठक में चर्चा के दौरान, वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्रियों ने वित्त और स्वास्थ्य संयुक्त कार्य बल (जेएफएचटीएफ) के तहत वित्त तथा स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच बेहतर सहयोग के माध्यम से महामारी की रोकथाम, निपटने की तैयारी और कार्रवाई (पीपीआर) के लिए वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त करना जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। डॉ. मनसुख मांडविया ने संयुक्त कार्य बल की बैठक में महामारी कोष द्वारा प्रस्तावों के लिए पहले आह्वान की घोषणा की। उन्होंने कहा, यहां पर यह ध्यान देने योग्य है कि ऐसी 75 प्रतिशत से अधिक परियोजनाएं जिन्हें इस प्रारंभिक आह्वान से समर्थन प्राप्त होगा, वे एलआईसी/एलएमआईसी देशों के भीतर केंद्रित हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने भविष्य के स्वास्थ्य संकटों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में डे जीरो फाइनेंसिंग की आवश्यकता को स्वीकार किया। उन्होंने इस संबंध में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक के साथ-साथ जी20 तथा जी7 देशों में इस मुद्दे को हल करने के उद्देश्य से एक प्रणाली बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को एकजुट करने की आवश्यकता है। डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि आपातकालीन चरण से अलग इस सहयोग को बनाए रखने और विभिन्न समन्वय व्यवस्थाओं की खोज से वित्त एवं स्वास्थ्य संस्थागत समन्वय के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियों व दृष्टिकोण को विकसित करने में जी20 देशों तथा व्यापक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सहायता मिले

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुश्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत संयुक्त कार्य बल ने पहली बार एक बहु-वर्षीय कार्य योजना को अपनाया है और चयनित प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों को भी इसमें आमंत्रित किया है, जिससे कम आय वाले देशों की आवश्यकताओं को भी सामने रखा जा सके। वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्रियों ने भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान जेएफएचटीएफ द्वारा दिए गए विचारों का स्वागत किया जिनमें निम्नलिखित बिंदु शामिल किये गए हैं:
विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व बैंक, अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक के बीच सहयोग के माध्यम से आर्थिक परेशानियों तथा जोखिमों (एफईवीआर) के लिए रूपरेखा बनाई गई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक द्वारा तैयार किये गए महामारी प्रतिक्रिया वित्तपोषण विकल्पों एवं अंतरालों की मैपिंग पर रिपोर्ट।
कोविड-19 महामारी के दौरान वित्त स्वास्थ्य संस्थागत व्यवस्थाओं पर सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों पर रिपोर्ट।
इस कार्यक्रम में नीति आयोग से श्री वीके पॉल (सदस्य) स्वास्थ्य, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव श्री सुधांश पंत, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक श्री राजीव बहल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अपर सचिव श्री लव अग्रवाल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में जी20 सदस्य देशों और आमंत्रित राष्ट्रों के स्वास्थ्य मंत्रियों तथा प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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