श्री गिरिराज सिंह ने श्रीनगर में ‘पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय विषयगत कार्यशाला’ का उद्घाटन किया।
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श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि चूंकि भारत ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, इसलिए देश द्वारा निर्धारित इस लक्ष्य को प्राप्त करना न केवल नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है, बल्कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करने में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसडीजी के तहत 17 लक्ष्यों और 169 गंतव्यों को देश भर में पंचायतों के अधिक योगदान से ही हासिल किया जा सकता है।
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श्री सिंह ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया मंत्र ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ अपरिहार्य है क्योंकि अब पंचायतों को टिकाऊ, न्यायसंगत, पारदर्शी और जिम्मेदार होने के साथ-साथ सुशासन में भी बड़ी भूमिका निभानी होगी।
कार्यशाला के दौरान, श्री सिंह ने पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित ‘मेरी पंचायत मोबाइल ऐप’ के साथ एनसीबीएफ के संचालन दिशानिर्देश, सेवा-स्तरीय बेंचमार्क, स्व-मूल्यांकन और मॉडल अनुबंध भी जारी किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के संदर्भ में सर्वोत्तम रणनीतियों, दृष्टिकोण, अभिसरण कार्यों और अभिनव मॉडल; सर्वोत्तम प्रथाएं; ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में एसडीजी के विषयों की निगरानी, प्रोत्साहन और प्रतिबिंब का प्रदर्शन करना है।
इस अवसर पर केन्द्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री श्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा और राज्य प्रशासन को धरती के स्वर्ग यानी श्रीनगर में कार्यशाला के आयोजन के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया।
श्री पाटिल ने एसडीजी के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया और सरकारी विभागों और व्यक्तियों सहित सभी संबंधित लोगों से वर्ष 2030 तक एसडीजी प्राप्त करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों को साकार करने के लिए पूर्ण प्रयास करने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के रुख को दोहराया कि देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक गांवों का विकास न हो रहा हो।
उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च किया गया पंचायत विकास सूचकांक देश भर में पंचायतों के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों को प्रतिबिंबित करने का काम करेगा।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब विकास की बात आती है तो जम्मू-कश्मीर में पिछले चार वर्षों के दौरान एक बड़ा बदलाव देखा गया है और केंद्रशासित प्रदेश के ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों से अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के संस्थापकों ने कहा था कि पंचायतें भारत की आत्मा हैं और देश के कामकाज और प्रगति में सबसे आगे हैं।
उद्घाटन समारोह के दौरान श्री सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर), श्री अरुण कुमार मेहता, मुख्य सचिव, जम्मू और कश्मीर सरकार, डॉ. चंद्र शेखर कुमार, अपर सचिव, एमओपीआर, श्रीमती मनदीप कौर, आयुक्त एवं सचिव, आरडी एवं पीआर विभाग, जम्मू और कश्मीर सरकार, श्री विकास आनंद, संयुक्त सचिव, एमओपीआर, डॉ. बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, एमओपीआर और अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
भारत सरकार और राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र/अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि और देश भर से पंचायती राज संस्थानों के लगभग 1000 निर्वाचित प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
देशभर और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने भी राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लिया। साथ ही, विषयगत क्षेत्रों में पहल करने वाली पंचायतों ने भी कार्यशाला में भाग लिया।
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