भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2023 में खादी और ग्रामोद्योगी उत्पादों की ऐतिहासिक 15.03 करोड़ रुपये की बिक्री।
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27 नवंबर को खादी इंडिया पवेलियन में आयोजित समापन कार्यक्रम में बिक्री के आधार पर प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार से केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने सम्मानित किया। प्रथम पुरस्कार कर्नाटक की टीएनआर सिल्क खादी को दिया गया। इस स्टॉल पर 4,408,870 रुपये के खादी उत्पाद बिके। द्वितीय स्थान पर कर्नाटक की नाजनीन सिल्क खादी इंडस्ट्रीज रही, जिसने 3,076,600 रुपये के खादी और ग्रामोद्योगी उत्पाद की बिक्री की। 2,253,570 रुपये की बिक्री के साथ तृतीय स्थान पर भी कर्नाटक की संस्था शिरीन सिल्क खादी ग्रामोद्योग संघ रही। इसके अलावा बिक्री के आधार पर 10 स्टॉल्स को सांत्वना पुरस्कार भी दिये गए। देशभर से खादी इंडिया पवेलियन में भाग लेने आये 214 खादी और ग्रामोद्योग संस्था, पीएमईजीपी और स्फूर्ति यूनिट को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने बताया कि खादी इंडिया पवेलियन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अनुरूप तैयार किया गया था। खादी संस्थानों, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत स्थापित इकाइयों और देश भर से स्फूर्ति क्लस्टर के तहत स्थापित इकाइयों के माध्यम से खादी कारीगरों की भागीदारी के लिए 214 स्टालों की स्थापना की गई थी, जिसमें बेहतरीन दस्तकारी खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि खादी पवेलियन में स्थापित देशी चरखा, विद्युत चालित कुम्हारी चॉक, कच्ची घानी तेल निकालने की प्रक्रिया, मंदिर में पूजा के लिए उपयोग किए हुए पुष्पों को री-साइकल कर बनाई गई अगरबत्ती- धूपबत्ती बनाने के सजीव प्रदर्शन (Live Demonstration) को दर्शकों ने खूब पसंद किया। सेल्फी प्वाइंट पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी लेने का क्रेज युवाओं में जमकर दिखा।
केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने बताया कि खादी इंडिया पवेलियन में लगे 214 स्टॉलों पर भारतवर्ष के अलग-अलग क्षेत्रों के कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों द्वारा भारत की समृद्ध विरासत, शिल्प कौशल और हस्त कला को प्रदर्शित किया गया था। 40% से अधिक स्टॉल ‘खादी’ निर्माण से जुड़ी संस्थाओं को आवंटित थे, शेष स्टॉल में ग्रामोद्योग, पीएमईजीपी और स्फूर्ति की इकाइयों के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि 15.03 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बिक्री ने ग्रामीण भारत में रहनेवाले हमारे कारीगरों के हाथों को नयी शक्ति दी है। बिक्री ने ग्रामीण भारत में रहनेवाले हमारे कगा जमकर दिखा।
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