परमार (जीनगर)गौत्र के परम श्रद्धेय दादाबापु जुंझार श्री रणछोड़जी परमार के नवनिर्मित मंदिर (छतरी) में मुर्ति स्थापना व पूजन कार्यक्रम 22 फरवरी को।
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भीनमाल/सिरोही-समस्त परमार परिवार,के परम पूजनीय “दादाबापु जुंझार रणछोड़ जी परमार”के जुंझार स्थल का पुनः जीर्णोद्वार हो रहा है और दादाबापु नवनिर्मित मंदिर में पुनः प्रतिष्ठित होने जा रहे हैं,परमार परिवार का ये अकल्पनीय सपना जो पूरा होने जा रहा है आगामी 22 फरवरी को देवभूमि सिरोही की पावन धरा पर पूज्य दादाबापु के जुंझार स्थल के भव्य आयोजन का समस्त परमार परिवार भीनमाल साक्षी बनने जा रहा है।आप सभी को यह जानकर बहुत खुशी होगी कि श्री कुलदेवी व कुलदेव श्री सारणेश्वर महादेव की असीम कृपा व आप सभी स्वजनों एवं प्रियजनों के शुभाशीष से परमार गौत्र के परम श्रद्धेय दादाबापु जुंझार श्री रणछोड़जी परमार के नवनिर्मित मंदिर (छतरी) में मुर्ति स्थापना व पूजन कार्यक्रम रखा गया है| आप सभी परिवार सहित सम्मिलित होने की कृपा करें|मुख्य कार्यक्रम – दिनांक 22 फरवरी, 2024 माघ शुक्ला त्रयोदशी गुरुवार (पंचामृत स्नान व पूजन कार्यक्रम)
समय- दोपहर 12 से 3 बजे
भोजन प्रसादी- शाम 5 बजे से
भजन संन्ध्या – रात्रि 8 बजे से
स्थान – श्री सारणेश्वर महादेव रोड़, पुलिया के सामने, सिरोही
नोट- आप सभी से निवेदन है कि आप परिवार सहित पधारकर प्रसादी ग्रहण कर दादाबापु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
जुंझार दादाबापु रणछोड़ जी परमार का इतिहास (**) जुंझार रणछोड़ जी परमार का जन्म सिरोही राजस्थान में जीनगर परमार कुल में तेजाजी परमार के वहा माता मांगीबाई आसेरी की कोख से हुआ था रणछोड़ जी के दादाजी का नाम विकाज़ी परमार था,रणछोड़ जी और उनका परिवार कुल देव सारणेश्वर महादेव के परम भक्त थे नित्य नेम के अनुसार रणछोड़ जी रोज सुबह महादेव के दर्शन करने जाते थे।एक दिन नित्य नेम अनुसार रणछोड़ जी महादेव सारणेश्वर जी दर्शन करने जा रहे थे तो सिरोही से जैन समाज की कुछ औरते भी उनके साथ सारणेश्वर महादेव के दर्शन जाने के लिए तैयार हुई।
उस वक्त सिरोही रियासत की हद दरवाजों के अंदर ही हुआ करती थी और दरवाजों से बाहर वीरान जंगल हुआ करते थे उसी जंगल की झाड़ियों में मीणा डाकू लूटने के इरादे से घात लगाकर बैठे थे
दरवाजे के बाहर जाते ही रणछोड़ जी परमार और जैन महिलाओं के समूह पर उन मीणा डाकुओं ने हमला कर दिया,परमार कुल के वीर सपूत ने मीणा डाकुओं से शौर्य पराक्रम के साथ डट कर मुकाबला किया कई मीणा डाकुओं का विनाश करने के बाद जैन महिलाओं के रक्षार्थ माघ शुक्ल पक्ष नवमी विक्रम संवत 1891 को वीर रणछोड़ जी परमार सारणेश्वर दरवाजा के बाहर वीरगति को प्राप्त हुए।ऐसे वीर महापराक्रमी जुंझार जी रणछोड़ जी परमार की याद में सिरोही महाराज और परमार परिवार ने सारणेश्वर जी महादेव जी के चरणों में दुदिया तालाब की पाल पर वीर रणछोड़ जी परमार की याद में छतरी (शक्ति स्थल) बना कर उन्हे जुंझार के रूप में स्थापित किया।
आज रणछोड़ जी परमार के वरिष्ठ विकाजी परमार का भरा–पूरा परिवार भीनमाल में बसा हुआ हैं इस परमार परिवार के कुलदेव श्री सारणेश्वर महादेव जी ,कुलदेवी श्री अर्बुदा माता जी और इष्ट देवी के रूप में सुंधा माता जी की पूजा की जाती हैं।इस परमार परिवार के जुंझार दादाबापु के रूप में जुंझार रणछोड़ जी परमार की पूजा युगों –युगों तक स्मपूर्ण विकाजी परमार परिवार करता रहेगा।
*।। जुंझार रणछोड़ जी परमार की जय।।*
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