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किरण बाला ‘किरन’ युगधरा के अध्यक्ष पद पर चुनी गई।

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उदयपुर-युगधारा साहित्यिक सांस्कृतिक एवं वैचारिक संस्था का कल काव्य गोष्ठी के साथ ही आम सभा का चुनाव संपन्न हुआ जिसमें सर्वसम्मति से निर्विरोध उदयपुर की प्रसिद्ध साहित्यकार किरण बाला जीनगर ‘किरन’ को अध्यक्ष पद हेतु चुना गया। किरण बाला पिछले 20 वर्षों से इस संस्था से जुड़ी हुई है। इससे पूर्व किरण सचिव एवं महासचिव के पद पर रह चुकी है। संस्था के संस्थापक डॉ ज्योतिपुंज, निवर्तमान अध्यक्ष श्री अशोक जैन मंथन एवं कोषाध्यक्ष श्री प्रकाश तातेड़ जी की अगवानी में कई साहित्यकारों के समक्ष आम सभा का यह चुनाव संपन्न हुआ।चुनाव अधिकारी प्रो विमल शर्मा जी ने चुनाव संपन्न करवाए।किरण युगधारा के काव्यग्रंथ युगमंथन की प्रधान संपादक भी है।इस अवसर पर किरण ने कहा कि अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपते हुए संस्था ने मुझे विश्वास सौंपा है, संस्था की परंपरा की धरोहर सौंपी है, यह विश्वास और परंपरा मैं बनाए रखूंगी और अपना श्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगी।युगधारा संस्था की स्थापना 1990 में वसंत पंचमी को हुई थी। 34 वर्षों से प्रत्येक रविवार को साहित्यिक गोष्ठी करने की परंपरा का निर्वाह करती रही है। जिसमें गद्य और पद्य विधा में समान रूप से रचनाएं प्रस्तुत की जाती हैं। इस संस्था से कोई भी आम और खास व्यक्ति कभी भी जुड़ कर हिंदी एवम् राजस्थानी साहित्य जगत में अपनी रचनाओं की प्रस्तुति कर सकता है। इस संस्था से कई नवांकुर जुड़े और राष्ट्रीय एवम् अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहे हैं। यह संस्था समय-समय पर साहित्य जगत की प्रतिभाओं को सम्मानित करती रही है और 75 वर्ष से अधिक की उम्र के साहित्यकारों को अमृत सम्मान प्रदान करती है। युगधारा अन्य कई साहित्यिक संस्थाओं के साथ जुड़कर भी संयुक्त रूप से साहित्यिक कार्यक्रम करती है। यह संस्था मायड़ भाषा के उन्नयन हेतु प्रत्येक तीसरे रविवार को राजस्थानी जाजम का आयोजन करती है जिसमें रचनाकार अपनी मायड़ भाषा की ही रचनाएं प्रस्तुत करते हैं।
किरण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों, दूरदर्शन पर विभिन्न विषयों पर अपने वक्तव्य और रचनाएं प्रस्तुत करती आ रही है। किरण बाला ‘किरन’ के तीन काव्य संग्रह है बहुत शीघ्र उनके दो काव्य संग्रह प्रकाशित होने वाले हैं, और अभी वह राधा कृष्ण विषयक एक बहुत लंबी कविता जो कि खंडकाव्य के रूप में है उस पर सृजनकार्य में व्यस्त हैं।बता दें कि फरवरी माह में ही किरण अपनी अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन से लौटी है जो कि श्रीलंका में संपन्न हुआ। वहां उन्होंने “राम का काम और काम का राम” पर अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की थी।चुनाव के साथ ही हुई काव्यगोष्ठी में नगर के विभिन्न साहित्यकारों ने रचनाएं प्रस्तुत की। प्रो निर्मल गर्ग, हबीब अनुरागी, कपिल पालीवाल, अरुण त्रिपाठी, विजय मारु, रेणु देवपुरा, प्रियंका भट्ट, शीतल श्रीमाली, मनमोहन मधुकर, प्रो विमल शर्मा, प्रकाश तातेड़, डॉ ज्योतिपुंज, किरण बाला ‘किरन’ बिलाल पठान, भवानी शंकर गौड़, श्याम मठपाल, दक्षल व्यास, यश, रजनी शर्मा, लोकेश चौबीसा, घनश्याम आर्य, विजय निष्काम, कैलाश अन्य कई रचनाकारों ने रचनाएं प्रस्तुत की। गोष्ठी का संचालन अरुण त्रिपाठी और आमसभा का संचालन युगधारा सचिव विजय मारु ने किया।

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