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केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भारत के नवाचार और स्टार्टअप व्यवस्था को प्रदर्शित करने वाले भारत इनोवेट्स पर रणनीतिक दस्तावेज़ जारी किए

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नई दिल्ली-केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत इनोवेट्स पर दो रणनीतिक दस्तावेज़ जारी किए। ये दस्तावेज़ उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों से जुड़े भारत के उभरते नवाचार और स्टार्टअप तंत्र को दर्शाते हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस दृष्टिकोण को मज़बूत करती है, जिसका मकसद भारत को ज्ञान का प्रयोग करने वाले देश से बदलकर, ज्ञान का सृजन करने वाले, नवाचार करने वाले और तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले देश के रूप में विकसित करना है।

इस मौके पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के मिशन डायरेक्टर श्री दीपक बागला, शिक्षा मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा की संयुक्त सचिव श्रीमती सौम्या गुप्ता और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मुख्य उद्देश्यों में से एक भारत को ज्ञान के उपभोग वाली व्यवस्था से बदलकर ज्ञान के सृजन और नवाचार वाली व्यवस्था में बदलना है। उन्होंने कहा कि भारत इनोवेट्स रणनीतिक दस्तावेज़ों में शामिल स्टार्टअप, भारत के प्रमुख संस्थानों, इनक्यूबेटरों और अनुसंधान तंत्र से उभर कर सामने आ रहे हैं, जो देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र की बढ़ती नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इनोवेट्स, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसका मकसद भारत की नवाचार क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के नवाचार-आधारित विकसित भारत बनाने के बड़े मिशन के अनुरूप है।

श्री प्रधान ने बताया कि भारत इनोवेट्स, भारतीय स्टार्टअप्स के लिए ऐसी वैश्विक निवेश फर्मों से जुड़ने के अवसर मुहैया करा रहा है, जो 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की संपत्ति का प्रबंधन करती हैं और दुनिया भर में 12,000 से ज़्यादा निवेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 100 से ज़्यादा वैश्विक निवेशक और प्रमुख संस्थानों के शामिल होने की उम्मीद है, जो भारत के डीप-टेक और नवाचार तंत्र में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे को दर्शाता है।

श्री प्रधान ने कहा कि इस पहल में निवेशकों ने पहले ही काफी दिलचस्पी दिखाई है और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव को मज़बूत करने के लिए पेरिस, टोक्यो और बेंगलुरु में रोडशो की एक श्रखंला आयोजित की गई है।

उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार व्यवस्था का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईटी, आईआईएससी, बिट्स पिलानी और अन्य प्रमुख संस्थान भारत इनोवेट्स के तहत अपने मुख्य शोध और नवाचार परियोजनाओं को प्रदर्शित करेंगे, जिससे राष्ट्रीय विकास में एकेडेमिया-आधारित नवाचार के बढ़ते योगदान को उजागर किया जा सके।

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श्री प्रधान ने बताया कि भारत इनोवेट्स, ‘इनक्यूबेटर इनोवेशन ब्रिज और इंडस्ट्री इनोवेशन ब्रिज के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने के लिए व्यवस्थित मार्ग तैयार कर रहा है। ये पहल भारतीय अन्वेषकों को दुनिया के बड़े संस्थानों, कॉर्पोरेट्स और नवाचार तंत्रों से जोड़ती हैं। इस सिलसिले में, उन्होंने बताया कि फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ नवाचार पर केंद्रित 28 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने की पहचान की गई है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रो. अजय कुमार सूद ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप एजेंडा को आगे बढ़ाने में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और शोध संस्थानों से निकलने वाले शोध-आधारित स्टार्टअप्स की प्रक्रिया को मज़बूत करके डीप-टेक स्टार्टअप व्यवस्था को तेज़ी से बढ़ाने में मंत्रालय की अहम भूमिका है। प्रो. सूद ने आगे कहा कि भारत को न सिर्फ़ डीप-टेक कंपनियाँ बनानी चाहिए, बल्कि डीप-टेक नवाचार की एक गहरी संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए।

इस मौके पर जारी किए गए दो रणनीतिक दस्तावेज़ों में ‘भारत इनोवेट्स स्टार्टअप कम्पेंडियम’ शामिल है, जिसमें देश भर से चुने गए 120 उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स की जानकारी दी गई है। ये दस्तावेज़ क्षेत्र-वार मार्केट इंटेलिजेंस, तकीनीक से जुड़े ट्रेंड्स, वैश्विक अवसरों की मैपिंग और रणनीतिक जुड़ाव के तरीके बताते हैं, ताकि स्टार्टअप्स भविष्य में वृद्धि के अवसरों की पहचान कर सकें। दूसरा रणनीतिक दस्तावेज़ आईआईटी, आईआईएससी और दूसरे प्रमुख संस्थानों जैसे बड़े उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों के लगभग 50 अत्याधुनिक शोध और नवाचार परियोजनाओं को दिखाता है।

इंडिया-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय 14-16 जून 2026 को फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट्स 2026 आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में 3,000 से ज़्यादा उपक्रमों में से चुने गए 120 बेहतरीन डीप टेक अन्वेषक एक साथ आएंगे, जो अंतरिक्ष, रक्षा, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अहम क्षेत्रों में भारत की अनुसंधान क्षमताओं को दिखाएंगे। इस कार्यक्रम का खास बिंदु आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास जैसे 15 प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों की भागीदारी है। इस समूह के पास 1,500 से ज़्यादा पेटेंट हैं और इन्होंने कुल मिलाकर 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का निवेश जुटाया है और इनमें ideaForge और Ather Energy जैसी दो सूचीबद्ध कंपनियाँ भी शामिल हैं।

 

 

 

 

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