सुंधा माता के झरने में बहे 5 श्रद्धालु एक की मौत 3 को बचाया गया और एक की तलाश जारी।
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भीनमाल -जालोर के जसवंतपुरा थाना इलाके सुंधा माता मंदिर परिसर में शनिवार सुबह से ही तेज बारिश का दौर जारी है। जहां पर पहाड़ी झरने के तेज बहाव में 5 श्रद्धालु बह गए। जिसमें माता के दर्शन करने आई डूंगरपुर की एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई। जसवंतपुरा थाना इंचार्ज प्रताप सिंह ने बताया- पानी में बहे तीन श्रद्धालुओं को पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से बाहर निकाल लिया। एक अन्य व्यक्ति की तलाश जारी है। पहाड़ी झरने पर शनिवार को बड़ी संख्या में दूरदारज से पर्यटक और श्रद्धालु आए हुए हैं।मौके पर एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीम पहुंच गई है। एसडीआरएफ ने ऊपर से नीचे तक पूरे नाले का सर्च किया है। इसमें कोई भी श्रद्धालु नहीं मिला। तलहटी से मंदिर तक जाने वाले रोप-वे को बंद कर दिया गया है। भीनमाल एडीएम दौलतराम चौधरी भी मौके पर पहुंच गए हैं। बड़ी संख्या में सुंधा माता मंदिर पहुंचे पर्यटक – बारिश के सीजन में सुंधा माता मंदिर में बड़ी संख्या में आसपास के जिलों और गुजरात से पर्यटक आए हैं। पुलिस ने एहतियात के तौर पर पर्यटकों को पानी से दूर रहने की चेतावनी दी है। वहीं सूचना के बाद जालोर एसपी ज्ञानचंद यादव भी सुंधा माता पहुंच गए।
भीनमाल डीएसपी अन्नराज पुरोहित ने बताया मंदिर की सीढ़ियों पर तेज बहाव से आ रहे झरने के पानी में 5 श्रद्धालु बह गए।
जिनमें से तीन लोगों को प्रशासन ने आसपास के लोगों की मदद से बचा लिया है।
जिनको इलाज के लिए जसवंतपुरा हॉस्पिटल में भर्ती कराया है।
एक महिला श्रद्धालु आहरी डूंगरपुर निवासी लक्ष्मी (45) पत्नी प्रेमचंद की मौके पर ही मौत हो गई।
जिसका शव कुछ दूर एक पाइप में फंस गया था।वहीं एक लापता श्रद्धालु की तलाश जारी है।
महिला के शव को सीएचसी जसवंतपुरा की मॉर्च्यूरी में रखवा दिया गया है और उनके परिजनों को घटना की जानकारी भी दे दी है।
तीनों घायल भावेश पुत्र कालूभाई (23) निवासी रुपावटी अहमदाबाद (गुजरात), बालूसिंह (43) पुत्र बीखसिंह राजपूत निवासी बारैया (गुजरात), लक्ष्मी (50) पत्नी काउआ रोत निवासी मउडी जोतरी (डूंगरपुर) है।
सुंधा माता तीर्थ स्थल जालोर शहर से 100 किमी दूर जसवंतपुरा कस्बे के पास है। यहां सुंधा पहाड़ पर चामुंडा देवी का 900 साल पुराना मंदिर है। लोग इसे सुंधा माता का मंदिर कहते हैं।
करीब 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चारों और पहाड़ों से घिरा है।
तेज बारिश के दौरान पहाड़ों से पानी तेज बहाव के साथ मंदिर के रास्ते पर बहता है।
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