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मानवजाति की समस्या का हल सामूहिक शक्ति और संघबद्धता पर निर्भर हैं-द्विवेदी।

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भीनमाल-शहर के गायत्री शक्तिपीठ में साधकों के नवरात्रि अनुष्ठान सम्पन्न करने के निमित्त नौ कुंडिय गायत्री महायज्ञ का आयोजन हुआ । इस मौके पर शान्तिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि हरिकृष्ण द्विवेदी ने कहा कि यज्ञ शब्द के तीन अर्थ हैं- देवपूजा, दान,संगतिकरण संगतिकरण का अर्थ है-संगठन यज्ञ का एक प्रमुख उद्देश्य धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों को सत्प्रयोजन के लिए संगठित करना भी है । इस युग में संघ शक्ति ही सबसे प्रमुख है । परास्त देवताओं को पुनः विजयी बनाने के लिए प्रजापति ने उसकी पृथक्-पृथक् शक्तियों का एकीकरण करके संघ-शक्ति के रूप में दुर्गा शक्ति का प्रादुर्भाव किया था । उस माध्यम से उसके दिन फिरे और संकट दूर हुए । मानवजाति की समस्या का हल सामूहिक शक्ति एवं संघबद्धता पर निर्भर है। । गायत्री यज्ञों का वास्तविक लाभ सार्वजनिक रूप से व जन सहयोग से सम्पन्न कराने पर ही उपलब्ध होता है।महेश व्यास ने बताया कि यज्ञ का तात्पर्य है-त्याग, बलिदान, शुभ कर्म हैं। अपने प्रिय खाद्य पदार्थों एवं मूल्यवान् सुगंधित पौष्टिक द्रव्यों को अग्नि एवं वायु के माध्यम से समस्त संसार के कल्याण के लिए यज्ञ द्वारा वितरित किया जाता है । वायु शोधन से सबको आरोग्यवर्धक साँस लेने का अवसर मिलता है । हवन हुए पदार्थ् वायुभूत होकर प्राणिमात्र को प्राप्त होते हैं और उनके स्वास्थ्यवर्धन, रोग निवारण में सहायक होते हैं । यज्ञ काल में उच्चरित वेद मंत्रों की पुनीत शब्द ध्वनि आकाश में व्याप्त होकर लोगों के अंतःकरण को सात्विक एवं शुद्ध बनाती है । इस प्रकार थोड़े ही खर्च एवं प्रयत्न से यज्ञकर्ताओं द्वारा संसार की बड़ी सेवा बन पड़ती है।कार्यक्रम में राणमल शर्मा और जोगाराम पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कन्हैयालाल शर्मा ने शानदार भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर चतुर्भुज राठी, बंशीधर राठी, मोतीलाल सोलंकी, हीरालाल सोलंकी, जेठाराम माली, ओखाराम माली,जसराज सुथार, करण सिंह सेवड़ी,जयरूपाराम माली, शिवलाल परमार, मदनलाल परमार, अन्नत प्रसाद वैष्णव, सांकलाराम सैन, मसराराम घांची, नरेन्द्र आचार्य, कोलचंद सोनी,ईश्वरसिंह,धनराज प्रजापत रमेश अग्रवाल, बाबूलाल माली,अर्जुनसिंह राव,धनराज प्रजापत, प्रदीप शर्मा,भावेश प्रजापत ,सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजन उपस्थित रहे।

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