जीनगर समाज भीनमाल ने शहीद बीरबल सिंह ढालिया की पूण्य तिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया ।
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भीनमाल- ‘जीनगर युवा संघर्ष समिति’ के सानिध्य में भीनमाल में स्थानीय दादा बापू मंदिर में अमर शहीद बीरबल सिंह ढालिया की पूण्य तिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजित किया गया। कार्यक्रम कि शुरुआत में दीप प्रज्ज्वलित कर एवं तस्वीर पर माल्यार्पण किया तथा शहीद बीरबल सिंह ढालिया अमर रहें के नारे लगाए गए। इस प्रकार है बीरबल सिंह ढालिया की एतिहासिक वीर गाथा- बीरबल सिंह ढालिया का जन्म 20 अक्टूबर 1918 को हुआ था। वे बीकानेर रियासत के जीनगर समाज से संबंध रखने वाले पहले ऐसे शहीद थे, जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। बीरबल सिंह, जिन्हें “अमर शहीद बीरबल” के नाम से भी जाना जाता है, बीकानेर प्रजा परिषद के एक सक्रिय सदस्य थे और सामंती अत्याचारों के खिलाफ़ लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे।आज़ादी की लड़ाई में बीरबल सिंह का योगदान अतुलनीय है। 30 जून 1946 को, रायसिंहनगर में एक जुलूस के दौरान, उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरोध में तिरंगा फहराया। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बर्बरतापूर्वक गोलीबारी की, जिसमें बीरबल सिंह ढालिया गंभीर रूप से घायल हो गए। अगले ही दिन, 1 जुलाई 1946 को, वे शहीद हो गए, और इस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनका नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गया। कार्यक्रम का संचालन जीनगर युवा संघर्ष के पूर्व अध्यक्ष श्री नारायण लाल बालौत ने किया उन्होंने शहीद बीरबल सिंह ढालिया के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए युवाओं का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में श्री शांन्तिलाल बालौत ने बताया कि शहीद बीरबल सिंह ढालिया महान योद्धा थे जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए यह सामाज के लिए गौरवान्वित महसूस होने की बात की। अगली कड़ी में श्री प्रकाश बालौत ने शहीद बीरबल सिंह ढालिया की मूर्ति लगवाने का आह्वान किया। एवं ललित कुमार परमार ने शहीद बीरबल सिंह ढालिया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहां की शहीद बीरबल सिंह ढालिया के बलिदान एवं शौर्य की कहानी बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जायें
तथा सामाजिक एकता पर जोर देने की बात की गई। अगली कड़ी में समिति के वर्तमान अध्यक्ष श्री श्याम लाल बालौत ने शहीद बीरबल सिंह ढालिया प्रेरणादायक वीर गाथा को घर-घर पहुंचाने की बात कहीं।
श्री नटवरलाल बालौत ने शहीद बीरबल सिंह ढालिया जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शहीद बीरबल सिंह ढालिया का जीवन और उनका बलिदान हमें यह सिखाता है कि आज़ादी केवल एक शब्द नहीं,
बल्कि कई वीर सपूतों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है।कार्यक्रम में इन्द्रमल बालौत,नारायणलाल बालौत, शान्तिलाल बालौत, नटवरलाल बालौत,खीयाराम जी सोनगरा, किशोर कुमार, रमेश गोयल,कुमार प्रकाश बालौत, नटवरलाल बालौत, श्यामलाल बालौत, उत्तम बालौत, संजय बालौत, अर्जुन बालौत, कानाराम सोलंकी, ललित कुमार बालौत, ललित कुमार परमार, जितेंद्र कुमार बालौत हितेश बालौत, कमलेश कुमार, जोगेंद्र बोराणा,पकंजराज, राहुल कुमार, सुरेश कुमार,
अभिषेक इत्यादि समाज बंधुओ ने कार्यक्रम में शिरकत दी।
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