राष्ट्रपति ने हैदराबाद में लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। 5 months ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 हैदराबाद-राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने तेलंगाना के हैदराबाद में तेलंगाना लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान का एक पूरा भाग सेवाओं और लोक सेवा आयोगों को समर्पित किया है।यह केंद्र और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की भूमिकाओं और कार्यों को दिए गए महत्व को दर्शाता है।राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय तथा समान अवसर और प्रतिष्ठा के हमारे संवैधानिक आदर्श लोक सेवा आयोगों के कामकाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संविधान की प्रस्तावना, सार्वजनिक रोजगार के मामलों में समान अवसर का मौलिक अधिकार और जनकल्याण को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु राज्य को निर्देशित करने वाले निर्देशक सिद्धांत, लोक सेवा आयोगों के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं।लोक सेवा आयोगों को न केवल समान अवसर के आदर्श से निर्देशित होना चाहिए, बल्कि परिणामों की समानता के लक्ष्य को भी हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। ये आयोग परिवर्तन के ऐसे माध्यम हैं जो समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देते हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि शासन प्रक्रिया में निष्पक्षता, निरंतरता और स्थिरता लोक सेवा आयोगों द्वारा चयनित लोक सेवकों के ‘स्थायी कार्यपालिका’ निकाय द्वारा सुनिश्चित की जाती है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनहितैषी नीतियों को लागू करने के लिए स्थायी कार्यपालिका में शामिल सिविल सेवकों की सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और योग्यता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोगों को भर्ती किए जाने वाले उम्मीदवारों की ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सर्वोपरि हैं और इनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कौशल और योग्यता की कमी को प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अन्य रणनीतियों के माध्यम से दूर किया जा सकता है लेकिन सत्यनिष्ठा की कमी गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है, जिन पर नियंत्रण पाना असंभव हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के रूप में रोजगार चाहने वाले युवाओं में वंचित और कमजोर वर्गों के लिए कार्य करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। हमारे सरकारी कर्मचारियों को महिलाओं की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होना चाहिए। लोक सेवा आयोगों द्वारा लैंगिक संवेदनशीलता को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और अपार विविधता से संपन्न राष्ट्र होने के नाते सभी स्तरों पर सबसे प्रभावी शासन प्रणालियों की आवश्यकता है। देश निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हम वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी अग्रसर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लोक सेवा आयोग अपनी जिम्मेदारियों को निभाते रहेंगे और उनके द्वारा चयनित और निर्देशित सिविल सेवकों की भविष्य के लिए तैयार टीम के निर्माण में योगदान देंगे। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories राजस्थान पुलिस कल्याण निधि बोर्ड की 26वीं बैठक में लिए गए संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय 7 mins ago मुख्य सचिव ने की बजट घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा, राष्ट्रहित में वित्तीय अनुशासन एवं मितव्ययिता अपनाएं 43 mins ago वीर तोलजी जुजार मामाजी मंदिर का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न 3 hours ago [responsive-slider id=1466] You may have missed राजस्थान पुलिस कल्याण निधि बोर्ड की 26वीं बैठक में लिए गए संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय 7 mins ago मुख्य सचिव ने की बजट घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा, राष्ट्रहित में वित्तीय अनुशासन एवं मितव्ययिता अपनाएं 43 mins ago वीर तोलजी जुजार मामाजी मंदिर का वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न 3 hours ago प्लेडियम जालोर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ SMBCL-2026 3 hours ago