राजस्थान हाईकोर्ट ने आरएएस अधिकारी पिंकी मीणा का निलंबन किया स्थगित, पाँच वर्ष पुराना निलंबन समाप्त
|
😊 Please Share This News 😊
|

जयपुर, 21 मई। लोक सेवकों के लंबे समय तक जारी रहने वाले निलंबन के विरुद्ध विकसित हो रहे न्यायशास्त्र के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए राजस्थान प्रशासनिक सेवा ( RAS) अधिकारी श्रीमती पिंकी मीणा के निलंबन आदेश पर स्थगन प्रदान किया।माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधेश बंसल ने एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 20023/2025 की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विपुल सिंघवी एवं आदेश अरोड़ा ने पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि आपराधिक चालान प्रस्तुत हो जाने, अभियोजन स्वीकृति जारी हो जाने तथा निलंबन को पाँच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपराधिक मुकदमे में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है। यह भी कहा गया कि समान परिस्थितियों वाले अन्य अधिकारियों को राहत प्रदान किए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता को बिना किसी उचित आधार के लगातार निलंबित रखा गया।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ता के मामले पर रिव्यू कमेटी द्वारा विचार किया गया था , किन्तु 16 दिसम्बर 2025 की बैठक में निलंबन समाप्त करने की अनुशंसा नहीं की गई। हालांकि, महत्वपूर्ण रूप से न्यायालय ने पाया कि रिव्यू कमेटी की कार्यवाही में निलंबन जारी रखने के लिए कोई कारण दर्ज ही नहीं किए गए थे।
माननीय न्यायमूर्ति बंसल ने यह भी टिप्पणी की कि जनवरी 2021 से लगातार निलंबन झेल रही याचिकाकर्ता के मामले में रिव्यू कमेटी की कार्यवाही में निलंबन जारी रखने के लिए कारणों का अभाव है।
फलस्वरूप, “समानता बनाए रखने के उद्देश्य से न्यायालय ने 15 जनवरी 2021 को पारित पिंकी मीणा के निलंबन आदेश पर स्थगन प्रदान कर दिया।
अब इस मामले को पुष्कर कुमार मित्तल द्वारा दायर संबंधित रिट याचिका के साथ अंतिम सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया गया है।
इस आदेश को सेवा कानून से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों की महत्वपूर्ण पुनर्युष्टि के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर उस सिद्धांत के संदर्भ में कि जांच पूर्ण हो जाने के बाद तथा सेवा से लगातार दूर रखने के लिए कोई ठोस कारण दर्ज न होने की स्थिति में निलंबन को अनिश्चितकाल तक यांत्रिक रूप से जारी नहीं रखा जा सकता।(PDF Court disition 205200200232025_3)
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय लंबे समय तक निलंबन झेल रहे सरकारी अधिकारियों से जुड़े मामलों में व्यापक प्रभाव डाल सकता है विशेष रूप से उन मामलों में जहाँ रिव्यू कमेटियाँ समान परिस्थितियों के बावजूद निलंबन जारी रखने के लिए ठोस एवं कारणयुक्त आधार प्रस्तुत नहीं करतीं।”
(अधिवक्ता विपुल सिंघवी)
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |
More Stories
[responsive-slider id=1466]
