12 वर्षों से भीनमाल में महिला सशक्तिकरण का जनआंदोलन बना ‘प्रज्ञा कौशल विकास सिलाई प्रशिक्षण शिविर’
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भीनमाल-“यदि एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, तो केवल उसका परिवार नहीं, बल्कि पूरा समाज सशक्त होता है।” इसी विचार को जीवन का संकल्प बनाकर पिछले 12 वर्षों से निरंतर संचालित प्रज्ञा कौशल विकास सिलाई प्रशिक्षण शिविर भीनमाल में महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामाजिक परिवर्तन का प्रेरक अभियान बन चुका है। निःशुल्क प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और स्वरोजगार के अवसरों के माध्यम से यह शिविर महिलाओं में आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन की नई चेतना जगा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आयोजित गरिमामयी समारोह में श्रीमती नीता पुरोहित एवं श्रीमती सलमा बानू पत्नी श्री इस्माइल खाँ को निःशुल्क सिलाई मशीनें भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वरोजगार से जोड़ा गया। यह केवल मशीन वितरण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत का प्रेरक अवसर था।
“आत्मनिर्भर महिला ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति” — डीएसपी शंकरलाल मंसूरिया
मुख्य अतिथि उप जिला पुलिस अधीक्षक श्री शंकरलाल मंसूरिया ने कहा—
“महिलाओं को शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ना सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण है। प्रज्ञा कौशल विकास शिविर जैसी पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण है।”
समारोह अध्यक्ष श्री बागसिंह राव ने कहा—
“सबसे बड़ा दान किसी को आत्मनिर्भर बनाना है। यह सिलाई मशीन केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि सम्मान, स्वाभिमान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।”
विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री दिनेश कुमार दवे ने कहा—
“कौशल विकास महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के साथ नेतृत्व और आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।”
वरिष्ठ समाजसेवी श्री कालूराम माली ने कहा—
“प्रज्ञा शिविर ने भीनमाल को महिला सशक्तिकरण की नई पहचान दी है। यह अभियान पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।”
हुनर से बदली ज़िंदगी — सफलता की प्रेरक कहानियाँ
श्रीमती सुंदर, भीनमाल
“प्रज्ञा शिविर ने मुझे केवल सिलाई नहीं सिखाई, बल्कि आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। आज मैं अपने हुनर से परिवार की आय बढ़ा रही हूँ और समाज में सम्मानपूर्वक अपनी पहचान बना चुकी हूँ।”
श्रीमती नीता पुरोहित
“निःशुल्क सिलाई मशीन मेरे लिए नए जीवन का उपहार है। अब मैं अपने घर से स्वरोजगार करूँगी और परिवार को आर्थिक सहयोग दूँगी। यह अवसर मेरे सपनों को नई उड़ान देने वाला है।”
श्रीमती भगवती
“आज मैं छह सिलाई मशीनों का कार्यशाला संचालित कर रही हूँ तथा कई महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही हूँ। हुनर ने मुझे आत्मनिर्भरता के साथ समाज में सम्मान भी दिलाया है।”
श्रीमती आशा
“तीन माह के प्रशिक्षण ने मेरा जीवन बदल दिया। आज मैं आत्मविश्वास के साथ स्वरोजगार कर रही हूँ और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हूँ।”
कुमारी किंजल
“आज मेरा अपना सिलाई केंद्र है। अपने हुनर के बल पर आत्मनिर्भर बनना मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
डॉ. घनश्याम कुमार व्यास : “हम केवल कौशल नहीं, आत्मविश्वास और स्वाभिमान का निर्माण कर रहे हैं”
शिविर के संचालक, भारत स्काउट एवं गाइड, भीनमाल के सचिव डॉ. घनश्याम कुमार व्यास ने कहा—
“हमारा उद्देश्य केवल सिलाई सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर करना है। प्रत्येक प्रशिक्षित महिला हमारे लिए सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति है। जब एक महिला आगे बढ़ती है, तब पूरा समाज आगे बढ़ता है। यही सेवा का सार, शिक्षा का उद्देश्य और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी मार्ग है।”
12 वर्षों की सतत सेवा : महिला सशक्तिकरण का प्रेरक मॉडल
पिछले 12 वर्षों से संचालित प्रज्ञा कौशल विकास सिलाई प्रशिक्षण शिविर ने निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से हजारों महिलाओं एवं बालिकाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए भीनमाल क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण का एक अनुकरणीय सामाजिक मॉडल विकसित किया है। यह अभियान शिक्षा, कौशल, सेवा, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।
2027 का संकल्प
डॉ. घनश्याम कुमार व्यास ने घोषणा की—
“वर्ष 2027 तक 100 और जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक स्वरोजगार से जोड़ने का हमारा संकल्प है। हमारा विश्वास है कि हर आत्मनिर्भर महिला विकसित भारत की नई शक्ति बनेगी।”
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का सम्मान किया गया तथा “सशक्त नारी – सशक्त परिवार – सशक्त समाज – विकसित भारत” के राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर केसाराम देवासी,आकाश बंजारा,हरजी देवासी सहित कई उपस्थित रहे।
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