श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी
परिवर्तनीय डिबेंचर के ज़रिए 5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की। इस सहायता से कंपनी को एसआईडीबीआई से दूसरे दौर का वित्तपोषण प्राप्त करने में भी मदद मिली, जिससे उसकी विकास की गति और मज़बूत हुई।
संयंत्र
स्वचालित रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र
इस वित्तीय सहायता से कंपनी उन्नत क्रम्ब रबर विनिर्माण बुनियादी ढांचे की स्थापना करने, दो लाख से अधिक बेकार टायरों को रीसायकल करने, स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन तरीकों को बढ़ावा देने में सक्षम हुई। इस उद्यम ने टीवीएस सुंदरम और हिन्कोल सहित प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ मजबूत औद्योगिक संबंध भी विकसित किए हैं, जिससे इसकी बाजार पहुंच और दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ रही है।
इस उपाय का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। इस समय, इस उद्यम से 15 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार दिया है, जिसमें 5 अनुसूचित जाति के कर्मचारी और 10 गैर-अनुसूचित जाति के कर्मचारी शामिल हैं। इसने लगभग 8 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई है, 2.09 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की है, 4.36 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है और 4.60 करोड़ रुपए का लाभ दर्ज किया है। यह परियोजना कचरे को मूल्यवान औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित करके, आजीविका सृजित करके और टिकाऊ विनिर्माण तरीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार औद्योगिक विकास के एक मॉडल के रूप में उभरी है।
श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी, प्रमोटर
अपनी इस यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए, श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी ने कहा:
“सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-एससी) की सहायता से हमारे उद्यम को वित्तीय सहायता मिली, जिससे हमें एक पर्यावरणीय चुनौती को स्थायी व्यावसायिक अवसर में बदलने में मदद मिली। आज, स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज बेकार टायरों को मूल्यवान औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित कर रही है, रोजगार सृजित कर रही है, सर्कुलर इकोनॉमी के तरीकों को बढ़ावा दे रही है और स्वच्छ और हरित भारत में योगदान दे रही है।“
स्वचालित रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र
स्वर्णकरुण प्रिंस्टन रबर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की सफलता दर्शाती है कि अनुसूचित जाति के लिए उद्यम पूंजी कोष के तहत मिलने वाली लक्षित वित्तीय सहायता से अनुसूचित जाति के उद्यमियों को उभरते क्षेत्रों में अभिनव उद्यम स्थापित करने, स्थायी रोजगार सृजित करने और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार औद्योगिक विकास के भारत के दृष्टिकोण में योगदान देने कैसे मदद मिल रही है।सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय उद्यमिता को बढ़ावा देकर और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाकर लगातार नवोन्मेषकों को सशक्त बना रहा है, रोज़गार के अवसर सृजित कर रहा है और देश के लिए एक हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य का निर्माण कर रहा है।