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टीईटी (TET)में दोबारा बैठने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

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नई दिल्ली-शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आती है।सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 01.09.2025 के अपने निर्णय में अन्य बातों के साथ-साथ यह भी कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है और अधिनियम के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए अनिवार्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि पात्र शिक्षकों को फैसले में निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर निर्धारित टीईटी योग्यता प्राप्त करनी होगी। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है:

https://api.sci.gov.in/supremecourt/2018/36466/36466_2018_9_1501_63764_Judgement_01-Sep 2025.pdf

इसके बाद, इस मामले में पुनर्विचार याचिकाओं का निपटारा करते हुए, 29.05.2026 के निर्णय़ के माध्यम से, सर्वोच्च न्यायालय ने टीईटी योग्यता प्राप्त करने की समय सीमा 31.08.2027 से बढ़ाकर 31.08.2028 कर दी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संबंधित सरकारों/प्राधिकारियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को नियमित रूप से, अधिमानतः वर्ष में दो बार, लगभग छह महीने के अंतराल पर आयोजित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि पात्र शिक्षकों को निर्धारित न्यूनतम योग्यता को पूरा करने का उचित अवसर मिल सके। 29.05.2026 का फैसला निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है:

https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/53434/53434_2025_7_1501_71637_Judgement_29-May 2026.pdf

सर्वोच्च न्यायालय ने बाल शिक्षा के निशुल्क एवं अनिवार्य अधिकार अधिनियम, 2009 के लागू होने से पहले भर्ती किए गए सेवारत शिक्षकों के सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग किया और निर्देश दिया कि 01.09.2025 को दिए गए निर्णय की तिथि तक जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने तक सेवा में बने रह सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित टीईटी योग्यता प्राप्त किए बिना ऐसे शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।

शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 

 

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