लक्ष्य के बीच संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की संवैधानिक भावना के अनुरूप, पत्रिका ने पिछले 75 वर्षों से विज्ञान संचार और वैज्ञानिक जागरूकता के विकास में निरंतर योगदान दिया है। CSIR-NIScPR के लोकप्रिय विज्ञान प्रभाग के प्रमुख श्री सी.बी. सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और ‘विज्ञान प्रगति’ के 75 वर्षों के सफर पर प्रकाश डाला।
मुख्य प्लैटिनम जयंती समारोह से पहले, 21 अगस्त 2026 को CSIR-NIScPR में एक उद्घाटन कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली के विभिन्न विद्यालयों के 50 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विज्ञान लेखिका सुश्री नेहा त्रिपाठी ने विद्यार्थियों के साथ विज्ञान कविता लेखन और कार्टून बनाने की गतिविधियों का संचालन किया। विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रश्नोत्तरी ‘जिज्ञासा’ में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूर्व वैज्ञानिक-एफ और विज्ञान संचारक डॉ. बी.के. त्यागी ने ‘विज्ञान की कहानियों की रोमांचक दुनिया’ विषय पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें विज्ञान और कल्पना के बीच आकर्षक संबंध से परिचित कराया। CSIR-NIScPR द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
मुख्य समारोह के दौरान, ‘विज्ञान प्रगति’ के अगस्त 2026 के विशेष अंक, CSIR-NIScPR प्रकाशन ‘मानव स्वास्थ्य और निरोगी जीवन’ और ‘रोमांचक विज्ञान कथाएं’, साथ ही संस्थान की द्विभाषी सूचना पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। ‘विज्ञान प्रगति @75’ विज्ञान कथा और विज्ञान कार्टून प्रतियोगिताओं के परिणाम भी घोषित किए गए, ‘विज्ञान प्रगति’ पर आधारित एक वीडियो दिखाया गया और पत्रिका की संपादकीय और डिजाइन टीमों को सम्मानित किया गया। ‘विज्ञान प्रगति के 75 वर्ष: विरासत, विमर्श और भविष्य’ विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता CSIR के संयुक्त सचिव श्री महेंद्र कुमार गुप्ता ने की और संचालन डॉ. मनीष मोहन गोरे, वैज्ञानिक-डी और ‘विज्ञान प्रगति’ के संपादक ने किया। इसके अतिरिक्त, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव और डॉ. मुकेश ए. पुंड ने क्रमशः ‘कार्टून विज्ञान की व्याख्या भी कर सकते हैं’ और ‘विज्ञान लेखन में मानवीय रचनात्मकता और मशीन इंटेलिजेंस (AI)’ विषयों पर संवाद सत्रों में अपने विचार साझा किए। इन सत्रों में रचनात्मकता, दृश्य माध्यम, मानवीय रचनात्मकता और विज्ञान संचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर चर्चा की गई।
भारत सरकार के शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक और मॉरीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय के पूर्व उप महासचिव डॉ. शुभंकर मिश्रा ने विशेष अतिथि भाषण दिया, जबकि CSIR-NIScPR के वैज्ञानिक-जी और विज्ञान प्रगति प्लेटिनम जयंती समारोह की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने समापन भाषण दिया। विज्ञान प्रगति के संपादक डॉ. मनीष मोहन गोरे ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पत्रिका के संपादकीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और कहा कि विज्ञान प्रगति का मुख्य उद्देश्य लेखक पर नहीं बल्कि लेख और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक विषयों का चयन समाज के लिए आवश्यक है और यही पत्रिका की लोकप्रियता का एक प्रमुख कारण है। वर्षों से विज्ञान प्रगति ने विविध रचनात्मक माध्यमों से पाठकों तक वैज्ञानिक ज्ञान का संचार किया है। CSIR-NIScPR के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, छात्रों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और पत्रिका के 75 वर्षों के सफर का जश्न मनाया। वक्ताओं ने विज्ञान संचार को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने तथा इसे उभरती प्रौद्योगिकियों और नए मीडिया के अनुरूप ढालने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘विज्ञान प्रगति’ की सह-संपादक शुभदा कपिल ने कार्यक्रम का संचालन किया।