भारत ने एचपीवी वैक्सीन की 80 लाख खुराकें दीं, जो कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है
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नई दिल्ली-भारत ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। फरवरी 2026 में शुरू हुए राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान के अंतर्गत ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन की 80 लाख (8 मिलियन) से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। यह उपलब्धि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के जरिए एचपीवी टीकाकरण की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है और किशोरियों के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है।
राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर से फरवरी 2026 में किया गया था। इस अभियान के अंतर्गत, 14 वर्ष की लड़कियों को माता-पिता की सहमति से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वैच्छिक और निःशुल्क एकल खुराक एचपीवी टीकाकरण प्रदान किया जाता है।
भारत के महारजिस्ट्रार (आरजीआई) के 2021 अनुमान के अनुसार, लगभग 1.2 करोड़ लड़कियां 14-वर्ष की आयु वर्ग के उस वार्षिक समूह का हिस्सा हैं, जिन्हें हर वर्ष इस पहल से लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एचपीवी टीकाकरण कवरेज के विस्तार में महत्वपूर्ण प्रगति की और कई राज्यों ने अपने लक्षित समूहों का पूर्ण कवरेज हासिल किया।
गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मिजोरम ने अपने-अपने लक्षित क्षेत्रों में 100 प्रतिशत कवरेज हासिल किया। बिहार, आंध्र प्रदेश और असम ने 90 प्रतिशत से अधिक कवरेज प्राप्त कर लिया है, जबकि कर्नाटक ने 85 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल किया है। छत्तीसगढ़, सिक्किम, केरल, तेलंगाना और ओडिशा ने 60 प्रतिशत से अधिक कवरेज प्राप्त किया।
राज्यों में, उत्तर प्रदेश में टीकाकरण की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है, जहां इस अभियान के अंतर्गत 22 लाख से अधिक किशोरियों को टीका लगाया गया है।
यह प्रगति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से समन्वित कार्यान्वयन, निरंतर सामुदायिक सहयोग और जिला स्तरीय स्वास्थ्य टीमों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है। राज्यों ने ग्रामीण, शहरी, दूरस्थ और भौगोलिक तौर पर चुनौतीपूर्ण इलाकों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण नेटवर्क के माध्यम से पात्र किशोरियों तक पहुंचने के लिए संदर्भ-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाए हैं।
मध्य प्रदेश और गुजरात ने निरंतर सामुदायिक सहयोग, समन्वित कार्यान्वयन और लक्षित जमीनी प्रयासों के दम पर अपने लक्षित समूहों में शत प्रतिशत कवरेज हासिल किया है। असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में हुई प्रगति भी भौगोलिक रूप से विविध क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में एकीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य नेटवर्क और समन्वित जमीनी कार्यवाही की भूमिका को दर्शाती है।
इस अभियान में सामुदायिक सहभागिता और भरोसेमंद जानकारी पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें माता-पिता, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, शिक्षक और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी एचपीवी टीकाकरण से संबंधित चिंताओं को दूर करने और गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए सक्रिय रूप से शामिल हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों, स्त्री रोग विशेषज्ञों और एम्स जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों सहित स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ शिक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम सहित पंक्ति में सबसे आगे के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने राज्यों और जिलों में जागरूकता और लामबंदी प्रयासों में सहयोग दिया है।
इस अभियान ने यू-विन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत के डिजिटल स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का भी लाभ उठाया है, जिससे कार्यक्रम प्रबंधकों को जिला स्तर पर टीकाकरण कवरेज की निगरानी करने, कवरेज अंतराल और छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान करने और अधिक प्रभावी कार्यक्रम योजना व संसाधन आवंटन में सहायता करने में मदद मिली है।
यह राष्ट्रीय अभियान एचपीवी टीकाकरण के व्यापक वैश्विक अनुभव पर आधारित है। विश्व स्तर पर एचपीवी वैक्सीन की 80 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं, जिससे इनके इस्तेमाल और सुरक्षा के संबंध में ठोस व्यावहारिक अनुभव मिला है।
एचपीवी टीकाकरण, जिसे शुरू में मुख्य रूप से अधिक आय वाले देशों की ओर से अपनाया गया था, धीरे-धीरे अन्य आय स्तरों वाले देशों के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में विस्तारित हो गया। वर्तमान में, 87 प्रतिशत उच्च-मध्यम आय वाले देशों, 78 प्रतिशत निम्न-मध्यम आय वाले देशों और 54 प्रतिशत निम्न आय वाले देशों ने अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में एचपीवी टीकों को शामिल कर लिया है।
विभिन्न आय वर्गों में एचपीवी टीकाकरण को अपनाने में हो रही वृद्धि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय रणनीतियों के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
इस अभियान के अंतर्गत सभी टीकाकरण सत्र सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में आयोजित किए जाते हैं।
टीकाकरण के बाद होने वाली दुर्लभ प्रतिकूल घटनाओं (एईएफआई) के उचित प्रबंधन के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं 24×7 स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह व्यवस्था टीकाकरण से जुड़ी किसी भी प्रतिकूल घटना का समय पर आकलन, निगरानी और प्रबंधन सुनिश्चित करती है।भारत ने एचपीवी वैक्सीन की 80 लाख खुराकें दीं, जो कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है
अभियान अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में शेष पात्र लाभार्थियों तक पहुंचने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि कोई भी पात्र लड़की पीछे न छूट जाए।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, एचपीवी टीकाकरण अभियान के बारे में जागरूकता बढ़ाने, इसकी पहुंच को आसान बनाने और इसके प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, स्वास्थ्य पेशेवरों, पंक्ति के सबसे आगे स्वास्थ्य कर्मियों और समुदायों के साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है।
एचपीवी वैक्सीन की 80 लाख खुराकें देने का लक्ष्य भारत की ओर से निवारक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ दीर्घकालिक सुरक्षा को प्रोत्साहन देने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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