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कल्प सूत्र में ॠषभदेव के सौ पुत्रों, दीक्षा, नमि-विनमि का हुआ विशेष उल्लेख।

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भीनमाल। स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर धर्मशाला प्रांगण में जैन समाज के वरिष्ठ मुनिराज हितेशविजय म. सा. ने पर्युषण महापर्व के सातवे दिन सोमवार को कल्पसूत्र का वांचन करते हुए ऋषभ देव के तेरह भवों तथा उनके पांच कल्याणकों के बारे में बताया। प्रभु ऋषभदेव का मरूदेवी की कुक्षि में अवतरण, कुलकारों की उत्पत्ति एवं नीति प्रचार, प्रभु का जन्म, नाम-वंश स्थापना, विवाह, ऋषभदेव की सन्तति, राज्याभिषेक और विनीता नगरी की स्थापना का वर्णन किया । इनके सौ पुत्रों के नाम, दीक्षा, तापसों की प्रवृति के साथ पुत्र रूप में नमि – विनमि की जानकारी दी । जैन मुनि ने अन्तराय कर्म के उदय से प्रभु द्वारा किया गया वार्षिक तप तथा इसका पारणा श्रेयांसकुमार का आठ भव का सम्बन्ध, आहारान्तरायकर्म कैसे बांधा तथा धर्म चक्र पीठ की स्थापना सहित, बाॅग देने की प्रवृति का उल्लेख किया । कल्पसूत्र के वाचन में चौबीस तीर्थकरों का परिचय दर्शक यंत्र का भी विशेष उल्लेख किया गया। मुनिराज जीतचंद विजय म सा का कैश लोचन भी धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं के समुख किया गया । इस अवसर पर दादा गुरुदेव राजेन्द्रसूरीश्वर म सा की आरती का लाभ भरतकुमार सुखराज दोसी ने लिया।चातुर्मास के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी   माणकमल भण्डारी ने बताया कि स्थानीय महावीर स्वामी जैन मन्दिर, महावीर चौक स्थित रिद्धि-सिद्धि मन्दिर, हाथियों की पोल स्थित पार्श्वनाथ मंदिर एवं माघ काॅलोनी स्थित रथ मन्दिर में पर्युषण पर्व के दौरान नियमित रूप से आठों दिनों तक भगवान की सुन्दर अंग रचना की जाती है। सभी मन्दिर में सामुहिक आरती के आयोजन में बडी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे है। इसी प्रकार सभी जिन मन्दिरों में भी प्रभु की प्रतिमा की आंगी सजाई जाती है। जिसका सैकडों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन – वंदन का लाभ ले रहे है।  पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के आठवें दिन मंगलवार को बारसा सूत्र का वांचन किया जायेगा । जिसमें चौबीस तीर्थंकरों की जीवनी का विस्तार से उल्लेख किया जायेगा । मंगलवार को ही क्षमा याचना के साथ संवत्सरी पर्व मनाया जायेगा।

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