सही समय पर रोकथाम करके ही थैलेसीमिया बीमारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है:स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय सचिव।
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इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उन्होंने थैलेसीमिया की प्रभावी रोकथाम के तरीकों और इष्टतम उपचार को बढ़ावा देने के लिए इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड थैलेसेमिक्स इंडिया के सहयोग से बनाया गया एक वीडियो लॉन्च किया।केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री अपूर्व चंद्रा ने रोग की व्यापकता को कम करने के साधन के रूप में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत वर्तमान प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से थैलेसीमिया परीक्षण को शामिल करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने इसे अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और गतिविधियों में शामिल किया है। स्वास्थ्य सचिव ने अन्य राज्यों से आग्रह किया कि वे थैलेसीमिया के लिए स्क्रीनिंग और परीक्षण को शामिल करने और उसका विस्तार करें।
थैलेसीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसके कारण शरीर में सामान्य से कम हीमोग्लोबिन होता है। 8 मई को प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है, ताकि इस बीमारी की रोकथाम के महत्व पर लोगों को जागरूक किया जा सकें। हितधारकों को संवेदनशील बनाने और थैलेसीमिया से प्रभावित लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित किए जाने के लिए कार्य किया जाता है। इस वर्ष की थीम है – “जीवन को सशक्त बनाना, प्रगति को गले लगाना: सभी के लिए न्यायसंगत और सुलभ थैलेसीमिया उपचार।” यह थीम थैलेसीमिया की व्यापक देखभाल के लिए सार्वभौमिक पहुंच की दिशा में सामूहिक मिशन को समाहित करती है।इस अवसर सुश्री आराधना पटनायक, अपर सचिव एवं प्रबंध निदेशक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन); भारतीय बाल रोग अकादमी के अध्यक्ष डॉ. जीवी बसवराज, थैलेसीमिक्स इंडिया की सचिव सुश्री शोभा तुली, आईएपी के पीएचओ चैप्टर के मानद सचिव डॉ. मानस कालरा और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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