सायला में जमीन की रजिस्ट्री का बड़ा घोटाला: प्रवासी भाइयों से 5.51 करोड़ की ठगी
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हवाला, कोड वर्ड और फर्जी कागजात—सायला में करोड़ों की ठगी का हाईटेक खेल
सायला ( प्रियंक दवे ) – सायला उपखण्ड मुख्यालय से एक बड़ा ठगी का मामला । बेंगलूरू में व्यापार करने वाले छह प्रवासी भाइयों को जमीन सौदे के नाम पर झांसे में लिया गया। आरोप है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी रजिस्ट्री तैयार की और उनसे 5 करोड़ 51 लाख रुपए से अधिक की राशि हड़प ली। मामला सामने आने के बाद पीड़ितों ने न्याय की मांग की है और संबंधित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। पिता परिवार का कहना यह है कि राजस्थान में भू-माफियाओं के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि अब वे सरकारी दस्तावेजों और रजिस्ट्रियों के साथ भी खुलेआम छेड़छाड़ कर रहे हैं। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो आम लोगों का सरकारी सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
क्या है मामला:
बेंगलूरू में व्यापार करने वाले छह प्रवासी भाइयों को जमीन सौदे के नाम पर झांसे में लिया गया। आरोप है कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी रजिस्ट्री तैयार की और उनसे 5 करोड़ 51 लाख रुपए से अधिक की राशि हड़प ली।
सायला क्षेत्र में जमीन खरीद-फरोख्त के नाम पर एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित जबरसिंह पुत्र वगतसिंह ने जिला कलेक्टर सांसद और एसपी को दिए ज्ञापन में बताया कि वे और उनके पांच भाई बेंगलूरु में व्यवसाय करते हैं।
पीड़ित के अनुसार, गांव के ही मोड़सिंह ने उन्हें आसाणा गांव स्थित मुख्य हाईवे पर करीब 0.7000 हेक्टेयर जमीन दिखाई। यह जमीन 5 करोड़ 51 लाख रुपए में तय हुई। विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने हवाला प्रणाली का सहारा लिया।सौदे के तहत सबसे पहले 1.11 करोड़ रुपए टोकन मनी के रूप में लिए गए। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को रजिस्ट्री के दिन शेष 4 करोड़ 40 लाख रुपए जालौर के एक ज्वेलरी शोरूम के पास कोड सिस्टम के जरिए लिए गए। पहचान सुनिश्चित करने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सएप पर 10 रुपए के नोट का फोटो भेजकर उसे टोकन के रूप में इस्तेमाल किया।पीड़ित का आरोप है कि रजिस्ट्री पूरी होने के बाद जब वे गांव पहुंचे, तो स्थानीय लोगों से उन्हें पता चला कि उनके साथ बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। जांच करने पर सामने आया कि उन्हें जो रजिस्ट्री दी गई थी, वह पूरी तरह से फर्जी थी।
आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से नकली दस्तावेज तैयार कर असली बताकर सौदा किया।
ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने सायला थाने में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ितों ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
सायला क्षेत्र में सामने आया यह मामला सिर्फ एक ठगी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। करोड़ों की जमीन डील, फर्जी दस्तावेज और फिर गायब हुए।
शिकायत मिलने के बाद भी सायला पुलिस की धीमी कार्रवाई कर रही है मामले में हवाला एंगल भी चर्चा में है।
शहर के बीचों-बीच करोड़ों रुपये के लेन-देन की बात सामने आना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं अवैध नेटवर्क सक्रिय है, जो प्रशासन की नजरों से बचकर काम कर रहा है।
पीड़ित जबरसिंह निवासी चौराऊ
दर्द साफ झलकता है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई 5.51 करोड़ रुपये आरोपियों को सौंप दी, लेकिन बदले में सिर्फ जाली कागजात मिले।
अब वे दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो न्याय मिल रहा है और न ही कोई ठोस कार्रवाई नजर आ रही है।यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं रह गया है,
बल्कि यह सवाल बन चुका है—क्या आम आदमी की मेहनत की कमाई इस तरह सिस्टम की खामियों में फंसकर डूबती रहेगी?
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