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विनियामक मंच की ऐतिहासिक 100वीं बैठक आयोजित हुई

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नई दिल्ली-विनियामक मंच ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में सफलतापूर्वक अपनी 100वीं बैठक आयोजित की, जो इसकी 21 वर्षों की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्ष 2005 में स्थापित ‘विनियामक मंच’ एक वैधानिक मंच के रूप में कार्य करता है, जो विद्युत क्षेत्र में विनियामक प्रथाओं के समन्वय और सुधार के लिए केंद्रीय और राज्य विद्युत विनियामक आयोगों को एक साथ लाता है।इन वर्षों में इस मंच ने 71 अध्ययन, 55 क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए हैं, 25 आदर्श विनियम जारी किए हैं और 6 तकनीकी समिति रिपोर्ट व 37 कार्य समूह रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं। इन पहलों ने देश में विद्युत क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा, भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन और टीईआरआई के विशिष्ट वक्ता श्री अजय शंकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सीईआरसी/एफओआर के अध्यक्ष श्री जिष्णु बरुआ ने विशिष्ट अतिथियों और एफओआर के सदस्यों का इस 100वीं बैठक में स्वागत किया।उद्घाटन समारोह के दौरान डॉ. पी.के. मिश्रा ने ‘विनियामक मंच’ को संबोधित किया और पिछले दशक में देश के विद्युत क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और इस सफलता में मंच द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसी मंच पर

 

खुली पहुंच, टैरिफ युक्तिकरण और विद्युत कंपनियों की अनबंडलिंग जैसी जटिलताओं पर चर्चा और सुधार किए गए। तब से यह ‘मंच’ एक सुधार और मार्गदर्शन देन वाली संस्था के रूप में विकसित हुआ है, जो इस क्षेत्र को विभिन्न विनियामकीय चुनौतियों से निपटने में मदद कर रहा है।

डॉ. मिश्रा ने “फोरम ऑफ रेगुलेटर्स कॉफी टेबल बुक” का भी विमोचन किया, जिसमें ‘मंच’ की यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य के विजन का विवरण प्रस्तुत किया है। डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने बदलते वैश्विक परिवेश में विकसित होते भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत की ऊर्जा संबंधी स्थिति तथा इस अंतर को पाटने में विद्युत क्षेत्र की भूमिका पर चर्चा की। श्री अजय शंकर ने ‘नेट ज़ीरो’ प्राप्त करने के लक्ष्य के बारे में बात की और बताया कि चल रहे ‘सौर मिशन’ से कैसे महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में तेजी लाने के लिए क्या पहलें की जा सकती हैं।

विनियामक मंच की 100वीं बैठक के उद्घाटन सत्र के अंत में सीईआरसी/एफओआर के सचिव हरप्रीत सिंह प्रुथी ने इस कार्यक्रम में उपस्थित रहने और विनियामकों के साथ अपने बहुमूल्य विचार व मार्गदर्शन साझा करने के लिए डॉ. पी.के. मिश्रा का आभार व्यक्त किया।

 

 

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