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प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस व पुस्तक विक्रय, शिक्षा मंत्री की घोषणा फाइलों में धूल खा रही

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“नेताओं के संरक्षण से बढ़े निजी स्कूलों के हौसले, अभिभावक परेशान”                                                                                                   जयपुर-(कमलेश आमेटा, विशेष संवाददाता – बेधड़क) प्रदेश में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की चांदी फिर से चल उठी है। मनमानी फीस, महंगी पुस्तकें और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों से खुलेआम वसूली की जा रही है।हैरानी की बात यह है कि शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने अप्रैल 2025 में मीडिया के सामने घोषणा की थी कि “सभी निजी और सरकारी स्कूलों में एक जैसी यूनिफॉर्म और पुस्तकों की गाइडलाइन लागू होगी”। लेकिन 1 साल बीत जाने के बाद भी विभाग ने इसका लिखित सर्कुलर जारी नहीं किया, जिसके कारण जमीनी स्तर पर इसकी कोई पालना नहीं हो रही।

पिछले सत्र में भी मीडिया ने शिक्षा के नाम पर हो रही लूट के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बावजूद निजी स्कूलों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के कई स्कूलों में नेताओं और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। शिकायत करने पर भी मामला दबा दिया जाता है।

रिजल्ट के दिन स्कूलों की दादागिरी
अभिभावकों का सबसे बड़ा आरोप है कि परीक्षा परिणाम के दिनों में स्कूल प्रशासन दादागिरी दिखा रहा है। बच्चों को रिजल्ट वाले दिनों ही उनके माता-पिता से बगैर पूछे खाली स्कूल बैग मंगवाकर जबरदस्ती किताबें, नोटबुक, जिल्द कवर आदि थमा दिए गए हैं। अभिभावकों को महंगी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री की घोषणा vs जमीनी हकीकत
अप्रैल 2025 में शिक्षा मंत्री ने घोषणा की थी कि:
एक जैसी यूनिफॉर्म: सरकारी + निजी सभी स्कूलों में विद्यार्थियों की ड्रेस एक जैसी होगी। टाई नहीं लगेगी। टीचरों के लिए भी यूनिफॉर्म और ID कार्ड अनिवार्य
किताबों की गाइडलाइन: स्कूल अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव नहीं बना सकते। किताबों की सूची, मूल्य वेबसाइट/नोटिस बोर्ड पर 1 महीने पहले लगाना होगा। कम से कम 3 विक्रेताओं पर किताबें उपलब्ध होंगी। कोई भी स्कूल 5 साल तक यूनिफॉर्म नहीं बदल सकता
सत्र 1 अप्रैल से: समय पर किताबें मिलें इसलिए नया सत्र 1 अप्रैल से शुरू
उल्लंघन पर कार्रवाई: गाइडलाइन तोड़ने पर सख्त कार्रवाई होगी

लेकिन लिखित आदेश नहीं आने से ये घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं और स्कूल मनमानी कर रहे हैं।

सरकार की योजना बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा की सरकार सरकारी स्कूलों में मुफ्त योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों में शिक्षा व्यापार बनकर रह गई है। शिक्षा मंत्री की घोषणा की अवहेलना खुलेआम हो रही है और अभिभावक लाचार होकर महंगी फीस भरने को मजबूर हैं।

अभिभावक संगठनों की मांग
अभिभावक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि:
– शिक्षा मंत्री की घोषणा का तुरंत लिखित सर्कुलर जारी कर सख्ती से लागू किया जाए
– प्रदेश में फीस नियमन कानून तुरंत लागू किया जाए
– निजी स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई कर मान्यता रद्द करने तक के कदम उठाए जाएं
– किताबें और यूनिफॉर्म खुले बाजार में उपलब्ध करवाई जाएं

जब तक सरकार सख्त कदम नहीं उठाएगी, तब तक मध्यम और गरीब वर्ग के अभिभावकों का शोषण ऐसे ही होता रहेगा।

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