चौदस-पूर्णिमा पर क्षेमंकरी माता मंदिर में उमड़ा आस्था का महासैलाब, ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंजी ऊंची पहाड़ी
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भीनमाल (मुकेश सोलंकी)-जालोर जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगर भीनमाल स्थित प्रसिद्ध क्षेमंकरी (खीमज) माताजी मंदिर में चौदस और पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। डेढ़ सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित मंदिर परिसर सुबह से ही ‘जय श्री क्षेमंकरी माता’ और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा।
सुबह तड़के से लगी लंबी कतारें
क्षेमंकरी माताजी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी रूपराम राजपुरोहित ने बताया कि चौदस की संध्या से शुरू हुआ दर्शनों का सिलसिला पूर्णिमा के दिन चरम पर पहुंच गया। तड़के महाआरती के साथ ही माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दरबार में शीश नवाकर मनोकामनाएं मांगने पहुंचे।
विशेष श्रृंगार और महाप्रसाद का आयोजन
क्षेमंकरी माताजी ट्रस्ट के अध्यक्ष कोलचंद सोनी ने बताया कि पूर्णिमा के पावन पर्व पर मां क्षेमंकरी की चतुर्भुज प्रतिमा का आकर्षक एवं भव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर ट्रस्ट एवं स्थानीय भक्तों की ओर से माताजी को छप्पन भोग व विशेष महाप्रसाद चढ़ाया गया। दिनभर ढोल-नगाड़ों की थाप पर भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय नो उठा।
सुरक्षा एवं यातायात के कड़े इंतजाम
क्षेमंकरी माताजी ट्रस्ट के मैनेजर प्रदीप नगर ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन कमेटी की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पहाड़ी की सीढ़ियों पर भक्तों की सुविधा के लिए विशेष छाया व पेयजल की व्यवस्था की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पहाड़ी के नीचे भारी सुरक्षा बल तैनात रहा। भामाशाह परबत प्रागाराम राजपुरोहित उनडी की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया।
भक्तों में दिखा अटूट विश्वास
दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने बताया कि मां क्षेमंकरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। चौदस-पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर मां के दर्शन मात्र से ही जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का प्रवाह होता है।
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