भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 01.09.2025 के अपने निर्णय में, अन्य बातों के साथ, यह कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी), बच्चों का निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार(आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 23 के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है तथा इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए इसे अनिवार्य माना गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है
https://api.sci.gov.in/supremecourt/2018/36466/36466_2018_9_1501_63764_Judgement_01 – Sep-2025.pdf.
इसके पश्चात, इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं का निस्तारण करते हुए, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 29.05.2026 के अपने निर्णय द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) की योग्यता प्राप्त करने की समय-सीमा को 31.08.2027 से बढ़ाकर 31.08.2028 कर दिया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 29.05.2026 के इस आदेश को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है:
https://api.sci.gov.in/supremecourt/2025/53434/53434_2025_7_1501_71637_Judgement_29 – May-2026.pdf.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 29.05.2026 के अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया है कि संबंधित उपयुक्त सरकारों एवं प्राधिकरणों को शिक्षक पात्रता परीक्षा(टीईटी) का नियमित अंतराल पर आयोजन करने का प्रयास करना चाहिए। अधिमानतः इसका आयोजन हरेक वर्ष दो बार किया जाए तथा लगातार होने वाली दो परीक्षाओं के बीच लगभग छह माह का अंतराल रखा जाए, जिससे पात्र शिक्षकों को निर्धारित न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त एवं उचित अवसर एवं समय मिल सके।
यह जानकारी लोकसभा में तारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने दी। ।