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नियमित स्नात्र पूजन करने से भवो-भव के बंधन कटते है : हितेशविजय म सा।

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भीनमाल।चौदह स्वप्नों से धन लाभ, पुत्र लाभ एवं सुख लाभ की प्राप्ति होती है ।स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर प्रांगण में रविवार को स्नात्र पूजन महोत्सव की भाव यात्रा का आयोजन किया गया ।जैन समाज के वरिष्ठ मुनिराज हितेशविजय म सा ने स्नात्र पूजन महोत्सव भाव यात्रा का वर्णन करते हुए कहा कि तीर्थंकर जब कोख में अवतरित होते हैं, उस समय वे तीन ज्ञान सहित गर्भ में आते हैं । भगवान की माता ने अल्पनिद्रा में रहते हुए उदार, कल्याणकारी, उपद्रवरहित, धनकारी, मंगलकारी ऐसे चौदह महास्वप्न देख कर जाग गयी । उन चौदह स्वप्नों में पहला हाथी, दूसरा वृषभ, तीसरा सिंह, चौथा लक्ष्मी, पांचवा फूलमाला, छठा चन्द्र, सातवां सूर्य, आठवां ध्वजा, नौवां कुंभ-कलश, दसवां पद्म सरोवर, ग्यारहवां क्षीरसमुद्र, बारहवां देवविमान, तेरहवां रत्नों का ढेर और चौदहवां निर्घूम अग्नि। ये चौदह स्वप्न कल्याणकारी और मंगलकारी करने वाले देख कर जागती हुई संतोष को प्राप्त हुआ । वह चित में आनन्दित हुई । उनका मन प्रेममग्न हो गया । उसे परम हर्ष उत्पन्न हुआ ।जैन मुनिराज हितेशविजय म सा ने चौदह स्वप्नों की महिमा का बखान करते हुए कहा कि उक्त स्वप्न देखने के बाद इसके फल से एक सुकुमार पुत्र की प्राप्ति होगी । जो भविष्य में महा पुरूष के रूप में जाना एवं पहचाना जायेगा । कार्यक्रम में बालिकाओं की प्रस्तुति के लिए पुरस्कारों की जड़ी लग गई । सुखीबाई भंवरलाल पालगोता परिवार की ओर से वाटर बैंग भी सभी बालिकाओं को दिये गये । इस आयोजन के लिए महिला मंडल, बालिका मंडल, पाठशाला के गुरूजी एवं चातुर्मास समिति के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया । स्नात्र पूजन महोत्सव भाव यात्रा के दौरान मुकेश बाफना, भंवरलाल कांनूगो, माणकमल भंडारी, भंवरलाल वर्धन, हेमराज मेहता, गुमानमल ठेकेदार, रमेश बोटी, पुखराज कांनूगो, घेवरचंद भंडारी, इन्द्रकुमार वर्धन, दलीचंद संघवी, विलमचंद मेहता, पारसमल संघवी, देवेन्द्र भंडारी, रमेश चंदन, भरत दोसी, मदनलाल सहित कई जैन समाज के बंधुओं एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने अपनी उपस्थित दर्ज कराई ।

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