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खेलकूद से बालकों का सर्वांगीण विकास संभव : हार्दिक रत्नसूरीश्वर म सा।

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दिल्ली।नंदीश्वर दीप जैन तीर्थ में भंडारी परिवार की ओर से आयोजित आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत शुक्रवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य हार्दिक रत्न सूरीश्वर म सा ने कहा कि आधुनिक युग में हमने बच्चों का बचपन छिन लिया है। उन पर स्कोर प्राप्त करने का भंयकर दबाव होता है।आध्यात्मिक चातुर्मास के मीडिया प्रभारी हीराचंद भंडारी ने बताया कि आचार्य ने कहा कि परमात्मा प्रभु जब बाल्यकाल में थे, तब अनंत गुणों के सागर होने के बाद भी परमात्मा सागर वर गंभीरा प्रकृति के थे । उन्होंने अपने ज्ञान का कभी घमंड नहीं किया। बल्कि माता-पिता की खुशी में ही अपनी खुशी जानकर पाठशाला पढ़ने गए। हमें भी परमात्मा के इन गुणों का अनुसरण करते हुए अपने ज्ञान का घमंड कभी नहीं करना चाहिए। आजकल के बच्चों का बचपन जैसे छूट गया है। बचपन खाने- पीने और खेलने- कूदने की उम्र होती है। इस उम्र में बच्चों को खूब खेलने देना चाहिए। उन पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए। आजकल माता-पिता अपने बच्चों से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें पाल लेते हैं और उन उम्मीदों को पूरा करने के लिए वे बच्चों को मात्र तीन साल की उम्र में ही स्कूल या प्ले- हाउस में दाखिल करवा देते हैं। बालक नैसर्गिक वातावरण के बचपन से वंचित हो जाता है। बालक को खुली हवा में बचपन का आनंद लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए। और आठ वर्ष की उम्र के बाद में ही स्कूल में दाखिल करवाना चाहिए। खेलकूद बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है और खेलने से बालकों का सर्वांगीण विकास होता है। वर्तमान समय में एकल संतान की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इससे बच्चे भाई-बहन के प्यार से वंचित हो जातें हैं।हर परिवार में तीन संतान तो होनी चाहिए। धर्म -शास्त्र में लिखा एक बेटा धर्म को संभाले। दूसरा व्यापार को और तीसरा बेटा व्यवहार को संभाले।हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए।धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिराज ज्ञान कलश विजय म सा ने कहा कि भारत त्याग प्रधान संस्कृति का देश है। भारतवर्ष में त्याग और समर्पण को सर्वोत्तम दर्जा दिया गया है। अनेक महापुरुषों ने त्याग और समर्पण को अपने जीवन में आत्मसात किया। रामायण जैसा महाकाव्य त्याग की ही कहानी है। त्याग व्यक्ति को महान बनाता है।कार्यक्रम के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गणेश तिवारी का भंडारी परिवार की ओर से अभिनंदन किया गया।          मित्र वही जो सद् राह दिखायें : साध्वी  राजेन्द्र नगर स्थित विवेकानंद आदर्श पब्लिक स्कूल में आयोजित बाल संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साध्वी शुचिप्रिया म सा ने कहा कि हम हमेशा ऐसा मित्र बनाएं जो हमें कल्याणकारी एवं सद् राह पर अग्रसर करें। स्वार्थी एवं मतलबी मित्रों से दूर रहना चाहिए। मित्रता  सोच समझकर करनी चाहिए। साध्वी उपशम दर्शिता ने कहा कि हमें कभी भी घमंड एवं दंभ नहीं करना चाहिए। मानव जीवन की महत्ता को समझते हुए जीवन में सार्थक और अच्छे कार्य करने चाहिए। अच्छे कार्यों का परिणाम हमेशा अच्छा ही होता है। जीवन में सदैव जागृत एवं चौकस रहना चाहिए। निदेशक ललित दवे ने सभी का आभार जताया। धर्मसभा में कविता भंडारी, इंद्रा गुलेच्छा, विनीता पटवा, मधु भंडारी, चन्द्रा पारेख, निर्मला मेहता, विजयलक्ष्मी भंडारी, मंजू भंडारी, संगीता भण्डारी, गीता भण्डारी, विमला मेहता, दिलीप छत्रगोता, नरेन्द्र सेठ, माँगीलाल भण्डारी, जवेरीलाल बोहरा इत्यादि सैकड़ों श्रावक श्राविकाएँ उपस्थित थी। कार्यक्रम का संचालन तेजसिंह राठौड़ ने किया।

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