डॉ. जितेंद्र सिंह ने सिम्बायोसिस सम्मेलन का उद्घाटन किया। 8 months ago 😊 Please Share This News 😊 Lalit Kumar(Raju) Editor-in-chief(lalit.space10@gmail.com)91+9782656423 पुणे, 19 सितंबर: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि जैव प्रौद्योगिकी भारत की भावी अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा समाधानों का प्रमुख चालक होगी। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी को “अगली औद्योगिक क्रांति” कहा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुणे स्थित सिम्बायोसिस अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में SYMRESEARCH 2.0: वैश्विक स्वास्थ्य के लिए जैव अभियांत्रिकी पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन, नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास और जीन अनुक्रमण पहल जैसी सफलताओं के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में खुद को अग्रणी वैश्विक राष्ट्र के रूप में स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा, “भविष्य की अर्थव्यवस्था, वास्तव में, जैव प्रौद्योगिकी से संबंधित होगी, ठीक उसी तरह जैसे 1990 के दशक में अंतिम क्रांति सूचना प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित थी।”डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकारी प्रयासों की जानकारी देते हुए पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी – बायो-ई3 नीति के शुभारंभ की जानकारी दी। इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती युवा आबादी के लिए स्थायी समाधान और रोजगार सृजित करना है। उन्होंने कहा कि भारत का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र 2014 में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर आज 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। अगले पाँच से सात वर्षों में इसे 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष-जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान में भारत की बढ़ती भागीदारी पर भी बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शर्मा द्वारा किए गए प्रयोगों का हवाला दिया। वहां शुभांशु शर्मा ने मांसपेशियों के क्षय, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संज्ञानात्मक प्रभावों और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में शैवाल और प्रोटीन की वृद्धि का अध्ययन किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये पहल अंतरिक्ष चिकित्सा जैसे नए क्षेत्रों के उद्भव की ओर इशारा करती हैं जिसके परिणामस्वरूप जैव प्रौद्योगिकी विभाग और अंतरिक्ष विभाग के बीच समझौता हुआ।समग्र स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता पर बल देते हुए, मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकृत करने के महत्व को और पुष्ट किया है, क्योंकि दुनिया भर के डॉक्टर इस संकट के दौरान आयुर्वेद और होम्योपैथी की ओर देख रहे थे। उन्होंने जीवन विज्ञान में स्टार्टअप और उद्यमिता के माध्यम से कुशल कार्यबल के विकास का भी आह्वान किया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी को ऐसा क्षेत्र बताया जो रोज़गार और नवाचार दोनों उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रोगों से बचाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और इसे “तीन ए” के सूत्र – जागरूकता, पहुँच और स्क्रीनिंग की सामर्थ्य – द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए।भारत के पहले स्वदेशी एंटीबायोटिक एचपीवी वैक्सीन और बड़े पैमाने पर तपेदिक जीन अनुक्रमण परीक्षणों जैसी नीति-संचालित उपलब्धियों की ओर संकेत करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये उपलब्धियाँ दर्शाती हैं कि भारत अब न केवल अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं में, बल्कि वैश्विक चिकित्सा प्रगति में भी योगदान दे रहा है।बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत तपेदिक जैसी संक्रामक बीमारियों से निपटने की दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। इसके साथ ही युवा आबादी में मधुमेह और फैटी लीवर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में भी वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने भारत के युवाओं की ऊर्जा को संरक्षित रखने के लिए जागरूकता और निवारक देखभाल के महत्व पर ज़ोर दिया जो “2047 के भारत के पथप्रदर्शक” होंगे।प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा के एकीकरण पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई-संचालित मोबाइल स्वास्थ्य क्लीनिकों के साथ अपने मंत्रालय के प्रयोग की जानकारी दी। ये क्लीनिक ग्रामीण रोगियों के लिए क्षेत्रीय भाषा इंटरफेस सहित, भौतिक और एआई डॉक्टरों को मिलाकर हाइब्रिड चिकित्सा परामर्श प्रदान करते हैं। उन्होंने महामारी से मिले सबक का हवाला देते हुए, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बीच बेहतर तालमेल का भी आह्वान किया।संबोधन के अंत में, मंत्री ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत प्रदान किए गए लचीलेपन का लाभ उठाने, अंतःविषय अध्ययन करने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ अपने काम को संरेखित करने का आग्रह किया। व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे Donate Now More Stories इंतजार खत्म! 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