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रेगिस्तानी भील समुदाय की मांग: DTSA लागू करने के लिए 6 जुलाई को भीनमाल में पैदल मार्च और ज्ञापन कार्यक्रम

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भीनमाल-पश्चिमी राजस्थान के भील आदिवासी समुदाय ने अपनी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के लिए ‘रेगिस्तानी जनजाति विशेष क्षेत्र’ (DTSA – Desert Tribal Special Area) घोषित करने की मांग तेज कर दी है। इस नीतिगत मांग को लेकर ‘भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा’ (जिला-जालोर) द्वारा आगामी 6 जुलाई 2026, सोमवार को सुबह 10:00 बजे भीनमाल में एक विशाल पैदल मार्च और ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।यह पैदल मार्च भील समाज रामदेवजी मंदिर (तलबी रोड, भीनमाल) से शुरू होकर उपखण्ड कार्यालय तक जाएगा, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।प्रमुख मांगें और समाधानDTSA की घोषणा: TSP, NON TSP, टाडा-माडा और सहरिया की तर्ज पर रेगिस्तानी भील बाहुल्य क्षेत्र को ‘Desert Tribal Special Area’ घोषित किया जाए।संविधान का अनुच्छेद 16 (4): भील समाज का तर्क है कि सरकारी नौकरियों (लोक नियोजन) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने के कारण सरकार को विशेष योजना बनाकर उन्हें उनका अधिकार देना चाहिए।विशेष कार्ययोजना: रेगिस्तानी जनजाति विशेष क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत और ठोस योजना बनाकर उसे धरातल पर जल्द लागू किया जाए।पिछड़ेपन और सरकारों की उदासीनता पर उठाए सवालपोस्टर के माध्यम से भील समुदाय ने अपनी आर्थिक बदहाली और नौकरियों में न के बराबर प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि

आजादी के इतने वर्षों बाद भी जोधपुर और पाली संभाग (बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, जालोर, पाली, बालोतरा और सिरोही) का यह भील समाज विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है।

समुदाय ने पिछली सरकारों पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है:2018 की रिपोर्ट: वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री काल में अप्रैल 2018 में क्षेत्रीय जनजाति विकास विभाग (उदयपुर) ने इस मांग को नीतिगत रूप से सही माना था, लेकिन शासन स्तर पर इस पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।

मारवाड़ क्षेत्रीय जनजाति विकास बोर्ड: अशोक गहलोत सरकार के समय 2 फरवरी 2021 को बोर्ड का गठन तो हुआ और छात्रावास भी बने, लेकिन मुख्य मांग DTSA पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। राजस्थान सरकार से अपील की है कि वे विधानसभा में साधारण बहुमत के जरिए इस नीतिगत मांग को जल्द से जल्द पारित कर भील समुदाय को उनका संवैधानिक अधिकार दें।

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