आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पंचायतों को अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं लेकिन उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व के उनके अपने स्रोतों को मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती टिंकू बिस्वाल ने स्थानीय शासन और क्षमता विकास के लिए राज्य के मजबूत संस्थागत ढांचे का उल्लेख किया।
केआईएलए के महानिदेशक डॉ. एन. देवीदास ने केरल में क्षमता विकास के अनुकूल परिवेश के संबंध में बताया कि कैसे निरंतर प्रशिक्षण, योग्यता-आधारित शिक्षा और संस्थागत समर्थन ने राज्य में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ करने में योगदान दिया है।
स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने पंचायतों से आग्रह किया कि वे स्थानीय प्राथमिकताओं की पहचान करके, पेशेवर परियोजना प्रस्ताव तैयार करके और भविष्य की विकास संबंधी आवश्यकताओं को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं से जोड़ कर विकास का दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं।
नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध संस्थागत सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने पंचायतों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जो सतत राजस्व उत्पन्न करने में सक्षम हों। उन्होंने प्रतिभागियों को इसके लिए पात्र प्रस्तावों के लिए उपलब्ध तकनीकी सहायता, परियोजना मूल्यांकन और वित्तीय सहायता के बारे में भी जानकारी दी। आउटरीच कार्यशाला में संवाद पर आधारित प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने इस दौरान केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया और अपने विचार साझा किए। इस सत्र ने प्रश्नों के समाधान, विचारों के आदान-प्रदान और कार्यान्वयन संबंधी दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। कार्यशाला में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के परिचालन ढांचे, पात्रता मानदंड, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, परियोजना वित्तपोषण, मौजूदा सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय और पंचायतों की ओर से राजस्व का सृजन करने वाले नवोन्मेषी परियोजना प्रस्तावों को प्रस्तुत करने, मूल्यांकन और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए चैलेंज मोड प्रक्रिया के विषय में विस्तृत तकनीकी सत्र भी शामिल थे।
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के अंतर्गत चलाए जा रहे आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय संसाधनों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों की आर्थिक क्षमता का दोहन करने में सक्षम बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। चयनित पंचायतों को ऋण योग्य परियोजनाओं के विकास के लिए तकनीकी सहायता प्राप्त होगी जिसका वित्तपोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), संस्थागत वित्त और सरकारी योजनाओं के समन्वय के माध्यम से सुगम बनाया जाएगा।
कोच्चि में आयोजित कार्यशाला जागरूकता बढ़ाने, संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और पंचायतों को सतत स्थानीय आर्थिक विकास और अपने स्वयं के राजस्व सृजन में वृद्धि के नवीन दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है।
पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के मंत्री श्री के.एम. शाजी, केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती टिंकू बिस्वाल, स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर, केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान (केआईएलए) के महानिदेशक डॉ. एन. देवीदास, पंचायती राज मंत्रालय और केरल सरकार के अधिकारी, नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधि तथा पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि और पदाधिकारी इस कार्यशाला में शामिल हुए। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में पूरे केरल की 210 से अधिक पंचायतों के प्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया जबकि लगभग 600 पंचायतों ने ऑनलाइन माध्यम से इसमें अपनी भागीदारी दर्ज कराई।