स्काउट सचिव डॉ.घनश्याम व्यास को कुरुक्षेत्र में आईएएस मनिता मलिक एवं कुलपति प्रो.अजय रंगा ने राष्ट्रीय नवाचार अवार्ड से नवाजा
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साक्षरता से स्वावलंबन तक: यूनेस्को साक्षरता अवार्ड और रेमन मैग्सेसे अवार्ड की भावना वाली साधना कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय नवाचार अवार्ड से सम्मानित भीनमाल (जालोर)/कुरुक्षेत्र-बंजर धरती भी हुनर उगा सकती है, इसका जीवंत प्रमाण है भीनमाल। भीनमाल की रेत से निकले एक शिक्षक के जुनून को आज गीता की धरती कुरुक्षेत्र ने राष्ट्रीय मंच पर नमन किया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड स्थानीय संघ भीनमाल के सचिव, राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर से संबद्ध, विप्र फाउंडेशन जालोर के जिला मंत्री, श्री महालक्ष्मी श्रीमाली समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं श्रीमाली समाज पुष्कर के पूर्व राष्ट्रीय संगठन सचिव – डॉ. घनश्याम कुमार व्यास, प्रबोधक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय वडली नाड़ी, नवापुरा चौपावतन, भीनमाल* को नेशनल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन द्वारा कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय नवाचार शोध संगोष्ठी में *राष्ट्रीय नवाचार शोध अवार्ड* से सम्मानित किया गया।
देश के 26 राज्यों से आए 200 श्रेष्ठ नवाचारी शिक्षकों के बीच जब भीनमाल की इस साधना की प्रस्तुति हुई, तो पूरा सदन तालियों से गूंज उठा।
राष्ट्रीय मंच पर सम्मान – गरिमामयी उपस्थिति
मुख्य अतिथि – श्रीमती मनिता मलिक, आईएएस, निदेशक, मौलिक शिक्षा विभाग, हरियाणा सरकार
अध्यक्षता – प्रो. (डॉ.) अजय रंगा, कुलपति, अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद
विशिष्ट अतिथि – प्रो. ब्रह्मजीत सिंह, निदेशक प्रभारी, NIT कुरुक्षेत्र, डॉ. लिली दीवान, डीन, NIT कुरुक्षेत्र, श्रीमती कंवलजीत कौर, अध्यक्ष, जिला परिषद कुरुक्षेत्र, श्री विनोद कौशिक, DEO कुरुक्षेत्र, श्री रोहताश वर्मा, DEO करनाल
क्या है ये साधना, जिसे कहा गया यूनेस्को और मैग्सेसे की भावना वाली साधना?
1. साक्षरता से स्वावलंबन तक – 13 वर्षों की मौन तपस्या:
डॉ. व्यास ने पिछले 13 वर्षों में महिला साक्षरता को सिलाई प्रशिक्षण से जोड़ा। सैकड़ों शिविर, हजारों बहन-बेटियों को प्रशिक्षित और फिर 1500 से अधिक सिलाई मशीनें भेंट कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। हर मशीन शिक्षा विभाग, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, माननीय उच्च न्यायालय के अधिकारियों, जिला प्रशासन, एसपी, डीवाईएसपी, सीआई के करकमलों से दिलवाई।
2. राजस्थान संस्कृत अकादमी से संबद्ध – भीनमाल के गौरव महाकवि माघ को राष्ट्रीय पहचान:राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर से संबद्ध रहते हुए महाकवि माघ की जन्मभूमि भीनमाल के गौरव को पुनर्स्थापित किया। अखिल भारतीय श्री महाकवि माघ विकास संस्थान* की स्थापना, हजारों लोगों को संस्कृत-सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना और राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों का आयोजन।
3. कोरोना काल में मानवता की मिसाल:
कोरोना महामारी में हजारों जरूरतमंदों को भोजन किट, सैनेटाइजर, मास्क वितरित कर लाभान्वित किया।
4. पर्यावरण चेतना का गुरुकुल और जागरूकता रैलियां:
राउप्रावि वडली नाड़ी – खेत-खलिहान के बीच बसा, घने पेड़-पौधों से घिरा रमणीय गुरुकुल।आत्मीय भामाशाहों के सहयोग से आकर्षक विराट पक्षी घर, कीड़ी नगरी, दाना-पानी के सकोरे। साथ ही सामाजिक कुरीतियों, साक्षरता, स्वच्छता के लिए हजारों लोगों को जोड़कर विशाल रैलियों का आयोजन।
5. 16 कुरीतियों पर कलम से प्रहार:
प्रेरक एवं मुख्य संपादक के रूप में 16 ज्वलंत सामाजिक कुरीतियों पर पुस्तकों का विमोचन, 5000 से अधिक मार्गदर्शिका पुस्तकों का संपादन।
डॉ. व्यास ने कहा – “ये सम्मान मेरा नहीं, भीनमाल की माटी का, उन 1500 बेटियों के स्वाभिमान का और कुरुक्षेत्र की पावन धरा का आशीर्वाद है।”
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