केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, कोटा द्वारा ‘ऑपरेशन युवा रक्षा’ के तहत कोटा विश्वविद्यालय में नशीले पदार्थों के सेवन और उसके दुष्प्रभावों पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
इस सत्र में कोटा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री मुरलीधर प्रतिहार, एनएसएस प्रमुख सुश्री श्वेता सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित रहे। सत्र के दौरान मुख्य अतिथि एवं कोटा के उप-नारकोटिक्स आयुक्त श्री नरेश बुंदेल ने छात्रों के साथ संवाद किया और बताया कि किस प्रकार बुद्धिमान एवं जागरूक व्यक्ति भी हेरफेर, साथियों के दबाव और सामाजिक परिवेश के प्रभाव में आ सकते हैं। व्यावहारिक उदाहरणों, प्रस्तुतियों और वीडियो के माध्यम से उन्होंने ‘फास्ट माइंड’ और ‘स्लो माइंड’ की अवधारणाओं को बखूबी समझाया। उन्होंने यह भी बताया कि नशीले पदार्थों का पहला सेवन धीरे-धीरे से बार-बार सेवन, आदत और निर्भरता की ओर ले जा सकता है।
छात्रों को पहली ही बार में “ना” कहने, सहकर्मियों के दबाव का विरोध करने और समझदारी भरा एवं जिम्मेदारीपूर्ण विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह सत्र काफी संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कई विचारणीय प्रश्न पूछे।
सत्र के समापन पर प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति की शपथ ली और नशीली दवाओं से दूर रहने तथा एक स्वस्थ एवं नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कोटा के जिला नारकोटिक्स कार्यालय (डीओओ) ने कोटा संभाग के अफीम किसानों के लिए अफीम, गांजा और अन्य अवैध मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। अभियान का संदेश देने वाले बैनर प्रदर्शित किए गए और कार्यक्रम का समापन “नशा मुक्त भारत की शपथ” के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने अपने-अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
झालावाड़ के डीओओ ने झालरापाटन तहसील के बाबरीखड़ा के पास स्थित अफीम की खेती वाले एक गांव में कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में मादक पदार्थों के सेवन के दुष्प्रभावों तथा नशे की रोकथाम में समुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया।
डीओओ, भीलवाड़ा द्वारा सवाईपुर-बडाला बाईपास हाईवे पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों स्थानीय निवासियों और अफीम काश्तकारों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को नशा मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
डीओओ, चित्तौड़गढ़-I द्वारा उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील के मेणार गांव में “युवा रक्षा और नशा मुक्त भारत अभियान” के तहत एक जागरूकता और स्वच्छता अभियान कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वस्थ एवं नशा मुक्त जीवनशैली पर जोर दिया गया तथा अधिकारियों और स्थानीय निवासियों की भागीदारी से स्वच्छता अभियान भी चलाया गया।
डीओओ, चित्तौड़गढ़-III ने अफीम की खेती वाले गांव मंगरोल में एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला गया। इस गतिविधि को ग्राम सभा की कार्यवाही में भी शामिल किया गया।
डीओओ, प्रतापगढ़-II ने छोटी सादड़ी के गोमाना गांव में जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान आयोजित किया, जिसमें स्वच्छता के संदेश को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के संदेश के साथ जोड़ा गया।
उपरोक्त सभी कार्यक्रमों में इस बात पर जोर दिया गया कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से स्थानीय समुदायों और किसानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इन पहलों के माध्यम से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो(सीबीएन) ने नशा मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अफीम की खेती वाले विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित जागरूकता गतिविधियों में 2 अक्टूबर, राष्ट्रपिता श्री एम. के. गांधी की जयंती के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिनका आत्म-अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और एक स्वस्थ समाज का संदेश आज भी नशीले पदार्थों के दुरूपयोग के खिलाफ प्रयासों को लगातार प्रेरित करता है।