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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की उपस्थिति में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना ( पीएमबीजेपी ) पर गहन सहयोग के लिए भारत में मिशन प्रमुखों के साथ परस्पर बातचीत की।

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“वसुधैव कुटुम्बकम” के भारत के लोकाचार के अनुरुप, भारतीयफार्मास्यूटिकल उद्योग वैश्विक बाजार में एक अग्रणी भूमिका कानिर्वाह कर रहा है और विवेकपूर्ण मूल्य पर व्यापक उपभोग कीउच्च गुणवत्तापूर्ण फार्मास्यूटिकल्स की पर्याप्त उपलब्धतासुनिश्चित करने के लिए मानव जाति के अधिक से अधिक योगदानके लिए अथक प्रयत्न करता रहा है। साझीदार देशों के साथ कामकरने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता जीवंत रिश्ते बनाने तथा इसगठबंधन को केवल व्यापार तक सीमित न रख कर इसे कल्याणतक ले जाने के माध्यम से और गहरा बनाने के प्रति हमारे समर्पणको प्रदर्शित करती है। ‘‘ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथारसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज यहांसुषमा स्वराज भवन में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कीउपस्थिति में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना परलगभग 100 साझीदार देशों के विेदेशी मिशनों के प्रमुखों के साथपरस्पर बातचीत के दौरान उक्त बातें कहीं।इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने विशेष रूप से, कोविड-19 महामारी के बाद विश्व भर में स्वास्थ्य एवं फार्मा जैसेसेक्टरों में सुधार लाने की आवश्यकता पर फिर से बल दिया।जेनेरिक में, दुनिया भर में भारत की मजबूत उपस्थिति का लाभउठाते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा, ‘‘  भारत को सही मायने मेंदुनिया की फार्मेसी कहा जाता है। 50 प्रतिशत निर्यात तथा विश्वभर में हर पांच जेनेरिक गोलियों में से एक भारत में उत्पादित होनेके साथ, हम दुनिया भर के कई देशों में लोगों के लिए दवाओं कोकिफायती बनाने में बड़े पैमाने पर योगदान करते हैं। ‘‘ उन्होंने देशोंको भारत द्वारा सर्वश्रेष्ठ कार्ययोजनाओं पर गौर करने तथा उनकीस्थानीय आवश्यकताओं के अनुरुप अपने देशों में उन्हें स्वेच्छा सेकार्यान्वित करने के लिए आमंत्रित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने‘‘ हमारे नागरिकों और विश्व के लिए औषधियों तथा चिकित्साउपकरणों की पहुंच और सामथ्र्य के साथ साथ समानता, समावेशिता में निरंतर सुधार लाने ‘‘  के भारत के लक्ष्य पर औरबल दिया।

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरुप, 2014 से अब तक विभिन्नस्वास्थ्य कार्यक्रमों और पहलों को आरंभ किया गया है। उन्होंनेकहा कि ‘‘ सरकार ने नकदीरहित उपचार, स्वास्थ्य एवं कल्याणकेंद्रों की स्थापना ( एबी-एचडब्ल्यूसीएस) की स्थापना और जनऔषधि परियोजना के माध्यम से जेनेरिक दवाओं को लोकप्रियबनाने जैसी युक्तियों के जरिये किफायती स्वास्थ्य देखभालउपलब्ध कराने का प्रयास किया है। ‘‘

जन औषधि परियोजना के लाभों को दुहराते हुए केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री ने कहा, ‘‘ यह प्रमुख कार्यक्रम आम लोगों, विशेष रूप सेनिर्धनों के लिए सस्ती दरों पर, वाणिज्यिक बाजार की तुलना में 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक कम मूल्य पर, गुणवत्तापूर्णदवाएं उपलब्ध कराने का प्रयत्न करता है। ‘‘ इन लाभों के साथसाथ, डॉ. मांडविया ने रेखांकित किया कि ‘‘ जन औषधिपरियोजना उद्यमियों के लिए खुदरा व्यवसाय आरंभ करने के लिएएक स्रोत है, यह नागरिकों को व्यापक लाभ प्रदान करती है तथासरकारों के लिए आवश्यक बजटीय सहायता कम है। ‘‘

इस कार्यक्रम से अर्जित लाभों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, डॉ. मांडविया ने इस मॉडल को अन्य देशों में दुहराने की संभावना परव्यापक रूप से चर्चा की। प्रायोगिक के रूप में, भारतीय फार्मानिर्यातकों के साथ लिंकेज स्थापित करने के द्वारा 50 फास्ट मूविंगदवाओं की खरीद की जा सकती है। समान आईटी और आपूर्तिश्रृंखला प्रणालियों, प्रचार कार्यनीतियों को अन्य देशों के साथसाझा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि समान युक्तियों केमाध्यम से, देश अपने नागरिकों को किफायती एवं गुणवत्तापूर्णजेनेरिक दवाएं उपलब्ध कर सकते हैं जो उन्हें उच्च लागत वालीपेटेंटकृत दवाओं पर आयात निर्भरता से बचा सकते हैं, उनकेनागरिकों के कल्याण को अधिकतम बना सकते हैं, रोजगार कासृजन कर सकते हैं तथा परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचा सकतेहैं।

केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्वीकरण में स्वास्थ्यपहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘‘ स्वास्थ्य लागत शासनऔर समृद्धि के लिए केंद्रीय तत्व है।  यहां तक कि विकसित देशोके बीच भी, आय विषमता को देखते हुए, स्वास्थ्य को कैसे सुलभबनाया जाए, इस पर पूरी वैश्विक बहस ने हमें एक साथ ला दियाहै। ‘‘ उन्होंने कहा कि इस वैश्वीकृत दुनिया में, किफायती, सुगम्यताऔर उपलब्धता के ‘‘ ट्रिपल ए लिंकेज ‘‘  पर ध्यान केंद्रित किएजाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विकअन्योन्याश्रितता, अंतर-संबंध भी सभी के लिए समाधान उपलब्धकरा सकता है जिसे महामारी की अवधि के दौरान भी देखा गयाथा। इसके साथ ही, डॉ. एस. जयशंकर ने साझीदार देशों को अपनेदेशों में जन औषधि परियोजना जैसी सार्वजनिक रूप से केंद्रितयोजनाओं को स्थापित करने और कार्यान्वित करने में सहायताकरने के लिए सभी आवश्यक मदद करने की पेशकश की।

एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से, स्कीम के विस्तृत विवरणप्रदर्शित किए गए।  1759 दवाओं ( 40 से अधिक प्रमुखचिकित्सकीय समूह ) से 280 सर्जिकल उपकरण तथा उपभोगयोग्य वस्तुएं जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध हैं। पिछले आठ वर्षों मेंविक्रय केंद्रों की संख्या और बिक्री की मात्रा में 100 गुना से अधिककी वृद्धि हुई है। औसतन प्रत्येक दिन, 1.2 मिलियन व्यक्ति जनऔषधि विक्रय केंद्रों पर जाते हैं। पीएमबीजेपी के प्रमुख सफलताकारकों में उत्पादों का गुणवत्ता आश्वासन, दक्ष लॉजिस्ट्क्सि, उद्यमियों को प्रोत्साहन, पर्याप्त उत्पाद रेंज, निरंतर संचार तथाजागरुकता, नागरिकों को बचत शामिल है।

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जन औषधि केंद्रों के परिणामस्वरूप, पिछले आठ वर्षों मेंलाभार्थियों के अपनी जेब से होने वाले खर्च में भारी बचत हुई हैजो लगभग 20,000 करोड़ रुपये ( 2 बिलियन डॉलर से अधिक ) के बराबर है।

मिशनों के प्रमुखों ने अपने अपने देशों में खरीद, अनुसंधान, कौशलविकास, दवा उत्पादन के लिए सक्रिय सहयोग के तरीकों औरसाधनों पर चर्चा की। यह बताया गया कि फार्मास्यूटिकल शिक्षाऔर अनुसंधान के 7 प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान हैं। इच्छुक देशएनआईपीईआर के साथ संस्थागत सहयोग के लिए अवसरों कीखोज कर सकते हैं।

फार्मास्यूटिकल विभाग की सचिव सुश्री एस अपर्णा, विदेशमंत्रालय के विशेष सचिव श्री प्रभात कुमार, स्वास्थ्य एवं परिवारकल्याण मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के  वरिष्ठ अधिकारीसंवादपरक सत्र के दौरान उपस्थित थे।

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