बीएलओ प्रदेश स्तरीय संघर्ष समिति में हुई महत्वपूर्ण चर्चा, दिया ज्ञापन।
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भीनमाल- बीएलओ संघर्ष समिति की मीटिंग में डॉ भाखराराम सारण ने बताया कि संघर्ष समिति के द्वारा किए जा रहे आंदोलन के दौरान शिक्षकों को प्रताड़ित किया गया एवं शिक्षकों के साथ दौहरा व्यवहार किया गया । संघर्ष समिति की मांगों को लेकर टालम टोल नीति अपनाई गई एवं शिक्षको को मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पडा ।उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अवगत कराया कि शिक्षा विभाग एवं बीएलओ शिक्षकों के साथ की जा रही प्रताड़ना को निम्न प्रकार से रेखांकित करते हैं । आरटीई एक्ट की धारा 27 के तहत शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा गया है लेकिन वर्ष पर्यंत बीएलओ कार्य में लगातार कार्य करवाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों का मूल कार्य प्रभावित होता है।हाल ही में राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आयोग की गाइड लाइन के अनुसार 55 वर्ष से अधिक एवं लगातार 10 वर्ष से अधिक काम करने वाले शिक्षकों को मुक्त कर राहत प्रदान की जावे । संघर्ष समिति ने चुनाव आयोग के नाम ज्ञापन देकर अपनी वेदना प्रकट की । शिक्षकों को एक तरफ अपने मूल विभाग की जिम्मेदारी निभानी होती है एवं दूसरी तरफ चुनाव आयोग का वर्ष पर्यंत चलने वाला कार्य करना पड़ता है । जिससे विश्राम कालीन विभाग में कार्य करने वाले कार्मिक को पूरे वर्ष में अवकाश लेने के लिए भी समय नहीं है ।इसी प्रकार बीएलओ शिक्षको के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है । चुनाव के समय में चुनाव कार्य को करने वाले कार्मिकों को टीए डीए एवं अन्य भत्ते मिलते हैं इसमें वर्ष पर्यंत चलने वाला काम होने के बावजूद भी किसी भी प्रकार का हार्ड अलॉउंस नहीं है । पूर्व प्रदेशध्यक्ष गजराजसिंह मोठ एवं जिलाध्यक्ष भानाराम पालीवाल ने संघर्ष समिति को संबोधित किया ।
इस अवसर पर विजयसिंह, गोपाललाल, दिनेशकुमार पुरोहित, शंकरलाल गहलोत, प्रेमसिंह, राजेंद्रसिंह, भंवरलाल ढाका, हनुमानराम बोला, हनुमान खीचड़, नरोत्तम, किशोरसिंह, मानाराम पालीवाल, रामचंद्र, बबूताराम माली, जगदीश बिश्नोई, परसाराम गर्ग, मोहनलाल संदेश, अशोककुमार बंजारा, प्रवीण जीनगर सहित कई बीएलओ ने भाग लिया ।
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