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साहित्य उत्सव 2024 में विद्वानों ने रखे विचार,कवियों ने किया रचनापाठ।

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राजस्थान साहित्य अकादमी व अखिल भारतीय साहित्य परिषद का साझा आयोजन।
उदयपुर-भारतीय नव संवत्सर के उपलक्ष में राजस्थान साहित्य अकादमी एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद उदयपुर महानगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य उत्सव 2024 के तहत विचार एवं कवि गोष्ठी आयोजित की गई।परिषद अध्यक्ष किरण बाला जीनगर ने बताया कि अकादमी लाइब्रेरी सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष विष्णु शर्मा हरिहर और विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् वीरेन्द्र पंचोली थे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पंडित नरोत्तम व्यास ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विष्णु शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय नव संवत्सर अपनी सटीक कालगणना के लिए जाना जाता है। मौसम के परिवर्तन के साथ ही नए साल का आगमन हमारी संस्कृति एवं प्रकृति के पारस्परिक अन्तर्संबंध को दर्शाता है। हमारे प्राचीन भारतीय साहित्य में इसी अन्तर्संबंध को लेकर विस्तार से व्याख्याएँ मिलती हैं। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद वीरेंन्द्र पंचोली ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय मान्यता के अनुसार नव संवत्सर के दिन से ब्रह्मा ने सृष्टि का सृजन प्रारम्भ किया था।

कार्यक्रम अध्यक्ष पंडित नरोत्तम व्यास ने अपनी प्रसिद्ध रचना “ढलानों पे सीधे खड़े मेरे पेड़ों नमस्कार है…” सुनाई और कहा कि भारतीय कालगणना सूर्य व चंद्रमा की गति की तरह शास्वत एवं चिरंतरन है। परिषद की महानगर इकाई अध्यक्ष किरण बाला जीनगर ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद के क्रियाकलापों की जानकारी देते हुए नव संवत्सर की प्राचीनता एवं उसके साथ हमारी संस्कृति के जुड़ाव के बारे में विचार रखे। कार्यक्रम में अकादमी से राजेश मेहता व प्रकाश नेभनानी उपस्थित रहे। स्वागत गौरीकांत शर्मा ने किया, धन्यवाद अकादमी के रामदयाल मेहरा ने दिया व संचालन सिम्मी सिंह ने किया।कवियों ने जमाया रंग –कार्यक्रम में शहर के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से रंग जमाया। दीपा पंत, अनिता अन्ना, सुनीता निमिष सिंह, प्रियंका भट्ट, कुंजन आचार्य, रेणु सिरोया कुमुदनी, कपिल पालीवाल, शिवदान सिंह सहित अन्य कवियों ने विविध विषयों पर कविता पाठ किया।

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