संयुक्त किसान मोर्चा की मांग, सोयाबीन 8 हज़ार रुपए क्विंटल बिकवाने की व्यवस्था करें सरकार।
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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन के दाम दिलाए सरकार।स्थिति नहीं सुधरी तो सोया प्रदेश का तमगा छिन जाएगा मध्य प्रदेश से।इंदौर-सोयाबीन के गिरते भाव से किसानों का सोयाबीन के प्रति मोह खत्म होता जा रहा है और आशंका है कि मध्य प्रदेश से सोया प्रदेश का तमगा भी छिन जाएगा , क्योंकि समर्थन मूल्य से भी नीचे बिकने के कारण अब किसान सोयाबीन के बजाय दूसरी फसल की ओर बढ़ने को मजबूर है। भाजपा के घोषणा पत्र में स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार किसानों को उनकी उपज का मूल्य C-2+50% के अनुसार दिए जाने और किसान की आय दुगनी करने का वादा भी अब मध्य प्रदेश के किसानों को छलावा लग रहा है।संयुक्त किसान मोर्चा के नेता रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव, चंदन सिंह बड़वाया, शैलेंद्र पटेल आदि ने बताया कि सरकार की गलत नीति के कारण सोयाबीन के भाव नहीं मिल रहे हैं ।किसान नेताओं ने कहा है कि फिलहाल मंडियों में जिस भाव में सोयाबीन बिक रहा है वह समर्थन मूल्य से 1000से 1200रु नीचे है ही साथ ही लागत से भी कम है। मध्य प्रदेश सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने ही सोयाबीन की लागत 32 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल आंकी है जबकि किसानों के अनुसार लागत 4000 से भी ज्यादा बैठती है भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि वह किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार C-2+50% के अनुसार फसल के दाम दिलाएगी। सी टू प्लस 50%का मतलब है फसल में लगने वाला खाद, बीज, सिंचाई ,मेहनत, पूंजी का ब्याज,मजदूरीआदि को जोड़कर उस का डेढ़ गुना । यदि यह सब जोड़ा जाए तो सोयाबीन के भाव 8000 से भी ऊपर होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में आधी कीमत मिल रही है जो किसानों के आक्रोश बढ़ा रही है।कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की रिपोर्ट के अनुसार भी सोयाबीन की उत्पादन लागत 3261 रुपये प्रति क्विंटल है
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों के मुताबिक 2013-14 में सोयाबीन का औसत भाव 3823 रुपये प्रति क्विंटल था, एक तरफ पिछले 10 वर्षों में हर चीज के दाम कई गुना बढ़ गए हैं जबकि सोयाबीनका भाव किसानों को 10 साल पुराना ही मिल रहा है।किसान नेताओं ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह व्यवस्था में सुधार करें और लागत से कम में बिक रहे सोयाबीन को अपने घोषणा पत्र के वादे के अनुसार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक बिकने की व्यवस्था करें ।
इसके अनुसार सोयाबीन के दाम ₹8000 से कम नहीं होना चाहिए लेकिन अभी आधे दाम भी नहीं मिल रहे हैं यदि सरकार ने किसानों की उपज वाजिब दाम पर बिकने की व्यवस्था नहीं की तो मध्य प्रदेश फिर करवट लेगा और प्रदेश में किसान बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे।
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