रचनाओं के जरिए मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को पाठकों तक पहुंचाएं- डॉ विपिन चन्द्र।
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साहित्य सृजन के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव की हो पहल- मनोज कुमार। उदयपुर-अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि लेखक और साहित्यकारों को साहित्य सृजन के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए पहल करनी होगी। वे मंगलवार को यहां परिषद के पदाधिकारियों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे।परिषद के प्रांत मीडिया प्रमुख डॉ कुंजन आचार्य ने बताया कि परिषद की उदयपुर महानगर और जिला इकाई पदाधिकारियों के साथ हुई इस बैठक को संबोधित करते हुएमनोज कुमार ने कहा कि किसी एक विधा पर ही केंद्रित होने की बजाय हर विधा में साहित्य सृजन होना चाहिए, साथ ही एक भाषा का साहित्यकार दूसरे भाषा के साहित्यकारों से भी मिले और उनके साथ अपने विचार साझा करें ताकि देशभर के साहित्यकारों का आपस में संवाद हो सके। उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए पहल करते हुए अपना योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ विपिन चंद्र पाठक ने कहा कि आदिवासी संस्कृति यहां की मिट्टी में रची बसी है। इसकी अपनी सांस्कृतिक विरासत है और इस विरासत को साहित्य लेखन, प्रकाशन और प्रसारण के जरिए पाठकों तक पहुंचाना चाहिए।इस अवसर पर कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में कवि गोष्ठी का आयोजन भी हुआ जिसमें प्रांत संयुक्त मंत्री शिवदान सिंह जोलावास,
प्रांत मीडिया प्रमुख डॉ कुंजन आचार्य एवं महानगर अध्यक्ष किरण बाला किरण ने प्रभु कृष्ण पर आधारित कविताओं का पाठ किया।
बैठक में साहित्य परिषद की ओर से भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई।
बैठक में महिला प्रतिनिधि डॉ अंजु बेनीवाल, जिला संयोजक ओम प्रकाश शर्मा, महानगर उपाध्यक्ष गौरीकांत शर्मा,
डॉ चंद्रकांत बंसल, डॉ सुनील खटीक, सूर्यप्रकाश सुहालका उपस्थित थे।
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