डॉ. बी. आर . अंबेड़कर जयंती पर सामाजिक समानता की स्थापना के लिए दौड़ एवं नशे को हमेशा हमेशा के लिए ना कहने का संदेश एक सराहनीय पहल-सीमा हिंगोनिया।
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एकता नव निर्माण ट्रस्ट द्वारा “Run for equality with Nope to Dope message” “ डॉ. बी. आर . अंबेड़कर जयंती पर सामाजिक समानता की स्थापना के लिए दौड़ एवं नशे को हमेशा हमेशा के लिए ना कहने का संदेश एक सराहनीय पहल” जयपुर -प्रति वर्ष बाबा साहेब की जयंती समारोह पर रन फॉर इक्विलिटी राजस्थान में” एकता नवनिर्माण ट्रस्ट” की एक सराहनीय पहल है जो प्रत्येक व्यक्ति में समानता की भावना तो उत्पन्न करेगी ही साथ ही “”नोप टू डॉप “” का संदेश अर्थात् नशे को ना कहना , ,यह समाज की युवा पीढ़ी के साथ साथ सम्पूर्ण समाज को उचित दिशा भी प्रदान करेगी ।सैकड़ों साल की गुलामी के बाद जब देश आजाद हुआ तो आवश्यक था कि देश के सभी नागरिकों को वास्तविक आजादी का अहसास भी कराया जाए और उसके सभी अधिकारों , अवसरों का भी संरक्षण किया जाए।इसी के निहितार्थ संविधान निर्मात्री सभा का गठन डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में हुआ और डॉ .बी. आर आंबेडकर को संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाया गया ।अब डॉ .बी. आर आंबेडकर के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी थी की देश के हर व्यक्ति, वर्ग , जाति ,धर्म , वंश, लिंग और समुदाय को अभी अभी आजाद हुए देश में वास्तविक आजादी भी महसूस हो और वह बिना किसी भेदभाव के अपने देश में खुल कर सांस ले सके और सभी अधिकार ,अवसर ,उसे समान रूप से प्राप्त हो।संविधान के भाग तीन में मूल अधिकारों के तहत अनुच्छेद 14 से 18 तक समानता के अधिकार की व्याख्या की गई है जिसमें साफ साफ निर्देशित भी किया गया है कि भारत देश का प्रत्येक नागरिक जाति, धर्म,वंश, लिंग, भाषा,जन्म स्थान से कोई विभेद नहीं रखता ,सभी को समान अवसर प्राप्त होंगे और अस्पृश्यता का भी अंत होगा ।लेकिन आजादी के 75 वर्षों में भी हम संविधान के इस उद्देश्य को सौ प्रतिशत रूप से प्राप्त नहीं कर सके और आज भी जगह जगह जाति, धर्म ,वंश,लिंग, भाषा आदि के आधार पर विभेद तो नजर आता ही है साथ ही जातीय ,धार्मिक और लिंग आधारित अत्याचार और अपराध भी दैनिक जीवन में देखने सुनने को मिल ही रहे ।कहीं कहीं तो भाषा ,जन्मस्थान ,रंग भेद भी आसानी से देखने सुनने को मिल ही जाता है अर्थात् वास्तविक आजादी प्राप्त होना अभी भी बाकी है खास तौर से कमजोर वर्गों में ।ऐसे विभेदकारी सामाजिक स्वरूप में समाज में सामाजिक समानता की स्थापना करनी है तो जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति , समुदाय ,वर्ग स्वयं ही जाति ,धर्म ,भाषा ,लिंग ,भाषा आधारित असमानता को त्याग कर अपने अपने स्तर पर समानता स्थापना हेतु प्रयास करे ही साथ ही शासन प्रशासन की भी एक बड़ी जिम्मेदारी है इस समानता की स्थापना करने हेतु ।एकता नव निर्माण ट्रस्ट द्वारा राजधानी जयपुर में 14 अप्रैल 25 को प्रातः समानता के लिए दौड़ का आयोजन करना स्वयं में समानता की स्थापना में एक मिल का पत्थर साबित हो सकता है यदि समाज का हर व्यक्ति, हर वर्ग, जाति , धर्म, वंश , लिंग के विभेद से बाहर निकल कर इसमें भाग ले तो या फिर इसमें अपना अप्रत्यक्ष सहयोग करे तो यह वास्तव में एक सार्थक और सफल पहल हो सकती है।
समाज में समानता की स्थापना का बाबा साहेब का संवैधानिक प्रयास और एक सपना जो ट्रस्ट के माध्यम से पूरा करने का पिछले छह सालों से अनवरत प्रयास चल रहा है ,यह अपने प्रयास में सफल हो इसके लिए सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोगियों को शुभ कामनाएं और समाज के सभी नागरिक इसमें बढ़ चढ़ कर भाग ले इस हेतु सभी को ससम्मान आवाह्न भी करते हैं।
सीमा हिंगोनिया
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
कमांडेंट
आरएसी थर्ड बटालियन
बीकानेर।
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