सनातन संस्कृति जागरण संघ द्वारा आयोजित यज्ञ में उमड़ा जनसमूह।
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सनातन संस्कृति जागरण संघ द्वारा आयोजित कुशलापुरा के यज्ञ में बड़ी संख्या में सभी जातियों के लोगों ने भाग लेकर हिन्दू एकता का परिचय दिया । हिन्दू समाज में व्याप्त जातिवाद, जातिगत भेदभाव, व्यसन, संस्कारों में आती गिरावट, धर्म से भटकाव एवं कुरीतियों व कुसंस्कारों को समाप्त कर प्रेम पुर्ण, भ्रातृत्व भाव से युक्त, सरस, समरस, एकरूप एवं संगठित हिन्दू समाज की स्थापना हेतु प्रयासरत सनातन संस्कृति जागरण संघ ने पिछ्ले कुछ महिनों से शहर में चल रहे अपने “घर घर यज्ञ अभियान” को विस्तार देते हुए इसके साथ ही “गांव गांव यज्ञ अभियान” की अगली कडी में कुशलापुरा गांव में बुधवार को अपने 25 वें यज्ञ का आयोजन किया ।
सनातन संस्कृति जागरण संघ के सदस्य छैलसिंह कुशलापुरा ने बताया कि बुधवार को कुशलापुरा स्थित महादेव मंदिर प्रांगण में यज्ञ का आयोजन किया गया । जिसमें मेघवाल समाज, चौधरी समाज, भील समाज, वाल्मीकि समाज, राजपूत समाज, ब्राह्मण समाज सहित अन्य समाजों के दर्जनों बन्धु व मातृ शक्ति ने एक जाजम पर बैठ भाग लिया। वेदमंत्रों के उच्चारण पर स्वाहा के साथ लगती यज्ञाहुति से वातावरण में एक अलौकिक आभा फैल गई । मानो चहुँओर फैली यज्ञ की महक ने हमें अपने सत्कर्मों की महक समाज में बिखेरने का ईश्वरीय संदेश दिया हो। संगठन के सदस्य कैलाशपुरी कुशलापुरा ने बताया कि सनातन संस्कृति जागरण संघ के सदस्य छैलसिंह के अथक प्रयासों से कुशलापुरा में यज्ञ का सफल आयोजन हुआ।
इस अवसर पर यज्ञ के बाद व्यसन मुक्ति के आग्रह पर लोगों ने बडी संख्या में माँस, मदिरा, तम्बाकू आदि त्यागने का प्रण लिया। इस अवसर पर सनातन संस्कृति जागरण संघ के सभी सदस्यों एवं आगन्तुक भाई बंधुओं ने एक साथ चाय-पानी लिया। कुशलापुरा गांव के बहुत से युवा एवं प्रौढ़ इस अवसर पर संगठन में शामिल हुए। इस अवसर पर समस्त हिन्दू समाज को संगठित, सशक्त, सबल और एक करने के लिए राजूसिंह माली व राव विक्रमसिंह आर्य ने अपने विचार रखे।
कुशलापुरा गांव के नागरिकों ने सनातन संस्कृति जागरण संघ के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त कि संगठन के मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि इस अवसर पर सनातन संस्कृति जागरण संघ के बहुत से सदस्य कुशलापुरा गांव में यज्ञ में उपस्थित रहे । जिसमें छैलसिंह, प्रभुराम जीनगर, नरपतसिंह आर्य, गजाराम मेघवाल, पदमसिंह, शंकरलाल गर्ग, राजुसिंह माली, प्रेमकुमार सेन, नरिंगाराम पटेल, राजेश टी सोनी, विक्रमसिंह जोधा, मांगीलाल राणा, मनोहर सुखाड़िया, दिलीप चौहान, रमेश जीनगर मोडर्न, कैलाशपुरी, रायमल राणा, जसवंत सुखाड़िया, रमेशपुरी, रम्यराजसिंह सहित कई लोग उपस्थित रहे । यज्ञ का सम्पादन राव विक्रमसिंह आर्य ने वैदिक रीति से करवाया।
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