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सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने “लैंगिक संवेदनशीलता – मीडिया में महिलाओं का चित्रण” पर बहु-हितधारक गोलमेज चर्चा का आयोजन किया।

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नई दिल्ली -सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने “लैंगिक संवेदनशीलता – मीडिया में महिलाओं का चित्रण” (जेंडर सेंसिटाइजेशन- पोर्ट्रेट ऑफ वुमन इन मीडिया) पर एक बहु-हितधारक गोलमेज चर्चा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 11 मार्च 2024 की सुबह होटल अशोक में आयोजित किया गया था।

पैनल में सूचना और प्रसारण मंत्रालय, प्रसार भारती, फिक्की, यूएन वुमन, नेटफ्लिक्स, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी, यूनिसेफ, बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड, रेडियो मेवात, टाइम्स ऑफ इंडिया, इक्विलिब्रियो एडवाइजरी एलएलपी, फीवर एफएम के वक्ता, सुश्री अनुप्रिया गोयनका (अभिनेत्री) शामिल थे और संचालन प्राइमस पार्टनर्स द्वारा किया गया।

चर्चा में ‘पारिस्थितिकी तंत्र का विश्लेषण’ और ‘आगे की राह’ पर दो विस्तृत सत्र शामिल थे।

चर्चा के व्यापक क्षेत्रों में महिलाओं के वर्तमान मीडिया चित्रण और सामाजिक धारणाओं पर उनके प्रभाव, मीडिया में महिलाओं की सामान्य रूढ़िवादिता की पहचान और उद्योग में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियां शामिल थीं। चर्चा निष्पक्ष और समावेशी रिवायत (नैरेटिव) और जवाबदेही रणनीतियां तैयार करने और लैंगिक रूप से संवेदनशील भाषा के उपयोग के लिहाज से मीडिया संगठनों की जिम्मेदारियों पर केंद्रित थी।विविधता को बढ़ावा देने और रूढ़ियों को तोड़ने के लिए सर्वोत्तम तौर तरीके लागू करने और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए मीडिया की क्षमता पर विचार-विमर्श किया गया। मीडिया में महिलाओं के लिए सशक्त आख्यानों को बढ़ावा देने, सकारात्मक बदलाव के उद्देश्य से मीडिया संगठनों, समर्थक समूहों और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच सहयोग के अवसरों की खोज करने पर विचार-मंथन हुआ, जिससे सभी नागरिकों को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के समान अवसर वाले एक समतापूर्ण समाज का निर्माण हो सके। सूचना और प्रसारण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव, आईएएस सुश्री नीरजा शेखर ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और समाज को बदलाव लाने और कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने एवं सभी स्थानों पर महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी के साथ एकजुट होना चाहिए। सरकार मीडिया प्लेटफार्मों पर हितधारकों के साथ चर्चा के माध्यम से आगे भी बदलाव को प्रोत्साहित करना जारी रखेगी।पैनलिस्टों ने दमदार कहानियों की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया, जिसे ओटीटी प्लेटफार्मों द्वारा काफी हद तक सुविधाजनक बनाया गया है। दरअसल, मजबूत कहानियां महिलाओं को रूढ़िवादी या ग्लैमराइज्ड भूमिकाओं में चित्रित करने का सहारा नहीं लेती हैं। गहरी जड़ें जमा चुके पूर्वाग्रहों को तोड़ने के उद्देश्य से मीडिया में भाषा के उपयोग और महिलाओं के चित्रण पर जोर देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा लाई गई “लिंग-समावेशी संचार पर मार्गदर्शिका” और भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “लैंगिक रूढ़िवादिता से निपटने पर हैंडबुक” पर चर्चा आयोजित की गई।अंत में, प्राइमस पार्टनर्स प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक सुश्री चारु मल्होत्रा ने कहा कि यह सत्र मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में लैंगिक परिदृश्य पर तमाम परिप्रेक्ष्यों से संबंधित दृष्टिकोण प्रदान करने के लिहाज से खासा समृद्ध रहा है। महिलाओं को शक्तिशाली और सामान्य स्थान वाली भूमिकाओं में नियमित बनाने की जरूरत है। कला को जीवन में प्रतिबिंबित करने के लिए, हमें महिला केंद्रित और पुरुष केंद्रित विषयों के बीच अंतर करने की आवश्यकता नहीं है और महिलाओं को मीडिया चित्रण में अपनी स्थिति के लिए दावा करना चाहिए। पैनलिस्टों द्वारा सुझाए गए आगे के रास्ते को मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के नीति निर्माताओं के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा।

 

 

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