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गजेंद्र भट्ट की ‘वक्त की लकीरें’ का लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन।

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उदयपुर– राजस्थान साहित्य अकादमी एवं युगधारा : साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य जगत ने एक और मील का पत्थर गढ़ा। सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी एवं साहित्यकार गजेंद्र भट्ट ‘हृदयेश’ के पहले कहानी संग्रह ‘वक्त की लकीरें’ का लोकार्पण समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन भव्यता से संपन्न हुआ।संवेदना से सराबोर कहानियों ने जीता दिल,आधुनिक कथा साहित्य में संवेदना की दिशा।
युगधारा संस्थाध्यक्ष ज्योतिपुंज ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि एवं शायर डॉ. प्रेम भंडारी ‘ग़ज़लकर’ ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुरेश पण्ड्या सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डॉ चंद्रकांता बंसल, डॉ मंजू चतुर्वेदी, वसंत सिंह सोलंकी, सचिव राजस्थान साहित्य अकादमी एवं किरण बाला ‘किरन’ युगधारा संस्था अध्यक्ष मंचासीन रहे।पुस्तक एवं लेखक परिचय श्रीनिवास अय्यर ने प्रस्तुत किया विशिष्ट अतिथि एवं पुस्तक समीक्षक डॉ. चंद्रकांता बंसल ने 15 कहानियों के संग्रह की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “यह संग्रह मानवता के प्रति आस्था जगाने वाला है। उन्होंने स्त्री चेतना, पर्यावरण रक्षा एवं रिश्तों के खट्टे-मीठे अनुभवों पर प्रकाश डालते हुए लेखक की यथार्थवादी दृष्टि की सराहना की।इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी का विषय था — “आधुनिक कथा साहित्य में संवेदना की दिशा”। मुख्य वक्ता डॉ. मंजू चतुर्वेदी ने विविध गद्य साहित्यिक उदाहरणों के माध्यम से आधुनिक कथा साहित्य में संवेदना के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। “संवेदना ही साहित्य की आत्मा है। साहित्यकार का फर्ज दुख उजागर करने तक सीमित नहीं, समाधान की राह दिखाना भी है।”लेखक गजेंद्र भट्ट ‘हृदयेश’ ने कहा, “यह संग्रह मध्यमवर्गीय समाज के संघर्षों का यथार्थ चित्रण है। मैं इसे उन सभी को समर्पित करता हूं जो सम्मानजनक जीवन के लिए जूझ रहे हैं।” यह आयोजन साहित्य की संवेदनशील धारा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने पुस्तक के समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा, “इन्होंने मानवता के लिए समर्पित की है। जिसकी आज बहुत कमी महसूस हो रही है।”कंदर्प भट्ट ने लेखक एवं पुस्तक से संबंधित विशेष जानकारियाँ साझा कीं, वहीं जयप्रभा भट्ट ने हाड़ा रानी पर राजस्थानी कविता प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।कार्यक्रम का संचालन दीपा पंत, शीतल एवं लावण्या शर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन महासचिव डॉ. सिम्मी सिंह द्वारा किया गया। अशोक जैन मंथन, मनमोहन मधुकर, गोपाल राज गोपाल, लोकेश चौबीसा, रामदयाल मेहरा, विजय निष्काम, इकबाल सागर राजेश मेहता, जयप्रकाश भटनागर सहित शहर के 100 से अधिक साहित्यकारों एवं भट्ट के स्वजनों ने इस आयोजन में अपनी उपस्थिति देकर इसे भव्य बनाया।

 

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