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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लिये गए एक ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा कर्मचारी चयन आयोग मल्टी टास्किंग स्टाफ (एसएससी एमटीएस) परीक्षा और संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तरीय परीक्षा हिंदी तथा अंग्रेजी के अलावा अन्य 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई।

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केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीके नेतृत्व में लिये गए एक ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार कार्मिकएवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा कर्मचारी चयन आयोगमल्टी टास्किंग (गैर-तकनीकी) स्टाफ (एसएससी एमटीएस) परीक्षाऔर संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तरीय परीक्षा हिंदी तथा अंग्रेजी केअलावा अन्य 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने की स्वीकृतिप्रदान कर दी गई है। स्थानीय युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देनेऔर क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य की पूर्ति केलिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर यह ऐतिहासिकनिर्णय लिया गया है। इस परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र अब हिंदी और अंग्रेजी के अलावाअसमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, उड़िया, उर्दू, पंजाबी, मणिपुरी (मीती भी) तथा कोंकणीभाषा में तैयार किये जाएंगे।

इस ऐतिहासिक निर्णय के परिणामस्वरूप लाखों उम्मीदवार अबअपनी मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा में भी परीक्षा में भाग लेसकेंगे और उनकी चयन संभावनाओं में भी बढ़ोतरी होगी।

विभिन्न राज्यों में कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा अंग्रेजी और हिंदीके अलावा देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित करने कीलगातार मांग की जा रही थी। सरकार ने अन्य मुद्दों के साथ-साथइस पहलू का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति (आयोगद्वारा आयोजित परीक्षाओं की व्यवस्था और पाठ्यक्रम की समीक्षाहेतु) नियुक्त की।

विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ-साथ इसप्रकार की कुछ सिफारिशें की थीं: एसएससी की नौकरियों विशेषरूप से ग्रुप ‘सी’ के पदों के अध्ययन से पता चलता है कि ये पदसरकार-नागरिक संपर्क में सबसे आगे हैं। भारत एक ऐसा देश हैजहां पर कई भाषाएं बोली जाती हैं, तो ऐसा होने के नाते 12वींऔर 10वीं की परीक्षा बहु भाषाओं में आयोजित करना उचितहोगा। एसएससी के साथ ऐसी प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए रेलवेभर्ती बोर्ड (आरआरबी) / बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान(आईबीपीएस) द्वारा उनकी परीक्षाओं में उपयोग की जाने वाली14 भाषाओं के साथ शुरुआत की जा सकती है और फिर संविधानकी आठवीं अनुसूची में उल्लिखित सभी भाषाओं को शामिल करनेके लिए इन्हें धीरे-धीरे बढ़ावा दिया जा सकता है।

सरकार ने विशेषज्ञ समिति की इस सिफारिश को स्वीकार करलिया है और एसएससी को इस संबंध में अपनाए जा सकने वालेतौर-तरीके तय करने को कहा है।

प्रारंभ में कर्मचारी चयन आयोग ने मल्टीटास्किंग स्टाफ परीक्षा, 2022 और संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तरीय परीक्षा, 2022 को15 भाषाओं (13 क्षेत्रीय भाषाओं + हिंदी + अंग्रेजी) में आयोजितकरने का निर्णय लिया है, जैसा कि बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान(आईबीपीएस)/रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) द्वारा उनकी परीक्षाआयोजित करने के लिए किया जाता है। एमटीएस परीक्षा के संबंधमें सूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। 15 भाषाओं मेंसीएचएसएल परीक्षा के आयोजन के लिए नोटिस मई-जून 2023 में जारी किया जाएगा।

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ.जितेंद्रसिंह ने कहा कि अंततः संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्धसभी भाषाओं को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि एसएससी लगातार यह सुनिश्चित करने के उद्देश्यसे कार्य करता रहता है कि आबादी के सभी वर्गों को क्षेत्रीयअसमानताओं को समाप्त करने तथा हमारे देश की भाषाईविविधता को पहचानने और इसे महत्व देने के साथ-साथ संविधानके सिद्धांतों का एहसास करने के लिए सफल होने के एक समानअवसर प्राप्त हों।

डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह महत्वपूर्ण पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिससे यह सुनिश्चित किया जासके कि सभी को नौकरी के लिए आवेदन करने के एक समानमौके प्राप्त हों और भाषा की बाध्यता के कारण कोई भी युवाअवसर पाने वंचित न हो या वह असुविधा में न रहे। उन्होंने कहाकि केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला उन परीक्षाओं के लिएकई राज्यों, विशेष रूप से दक्षिण भारत से आने वाले उम्मीदवारोंकी लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा, जो पहलेअंग्रेजी और हिंदी में आयोजित की जाती थीं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एमटीएस 2022 परीक्षा नोटिस को विशेषतौर से दक्षिण भारत के उम्मीदवारों और सोशल मीडिया पर भीशानदार प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इस तरह की पहली बहु-भाषा परीक्षा (एमटीएस 2022) 2 मई से शुरू होगी।

डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारोंसे स्थानीय युवाओं को अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने के इसअवसर का सदुपयोग करने और देश की सेवा में अपना करियरबनाने के लिए बड़ी संख्या में भाग लेने के उद्देश्य से प्रोत्साहितकरने हेतु एक व्यापक जन अभियान शुरू करने की आशा है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्वमें और केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन राज्य मंत्री डॉ.जितेंद्रसिंह के मार्गदर्शन में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग तथा विस्तार कोबढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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