प्रधानमंत्री ने दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आदि महोत्सव का उद्घाटन किया।
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उन्होंने कहा कि आदि महोत्सव कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होने वाली भारत की विविधता और शान का परिचायक है। प्रधानमंत्री ने कहा, “आदि महोत्सव अनन्त आकाश की तरह है, जहां भारत की विविधता इंद्रधनुष के रंगों की तरह दिखती है।” जिस तरह इंद्रधनुष में विभिन्न रंग मिल जाते हैं, उसकी उपमा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की भव्यता उस समय सामने आती है, जब अंतहीन विविधताएं ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’की माला में गुंथ जाती हैं और तब भारत पूरे विश्व का मार्गदर्शन करता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आदि महोत्सव भारत की विविधता में एकता को शक्ति देता है तथा साथ में विरासत को मद्देनजर रखते हुए विकास के विचार को गति देता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत ‘सबका साथ सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिसे पहले दूर-दराज माना जाता था, आज सरकार खुद वहां जा रही है और उस सुदूर स्थित और उपेक्षित को मुख्यधारा में ला रही है। उन्होंने कहा कि आदि महोत्सव जैसे कार्यक्रम देश में अभियान बन गये हैं और वे खुद अनेक कार्यक्रमों में सम्मिलित होते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बिताये गये दिनों में जनजातीय समुदायों के साथ अपने निकट जुड़ाव को याद करते हुए कहा, “जनजातीय समाज का कल्याण मेरे लिए व्यक्तिगत रिश्तों और भावनाओं का विषय भी है।” उमरगाम से अम्बाजी के जनजातीय क्षेत्रों में बिताये अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण वर्षों को याद करते हुये प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मैंने आपकी परंपराओं को निकट से देखा है, उन्हें जिया है और उनसे बहुत कुछ सीखा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय जीवन ने, “मुझे देश और उसकी परंपराओँ के बारे में बहुत-कुछ सिखाया है।”इस अवसर पर केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा;जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सुरुता और श्री बिश्वेश्वर टुडू; केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार, ट्राइफेड के अध्यक्ष श्री रामसिंह राठवा और सचिव, जनजातीय कार्य श्री अनिल कुमार झा भी उपस्थित थे।
मीडिया को संबोधित करते हुए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में अनुसूचित जनजातियों की ताकत, क्षमता और विरासत को अब उचित महत्व मिल रहा है। जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस आदि महोत्सव में प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति ने इस उत्सव के वास्तविक मूल तत्व को समृद्ध किया है और इस राष्ट्रीय महोत्सव के उद्देश्य को गति दी है।
मंत्री महोदय ने कहा कि आज दुनिया भारत के आदिवासियों को पहचानती है, यह सब हमारे प्रधानमंत्री के आदिवासियों को बढ़ावा देने के ठोस प्रयासों के कारण है। उनके आदर्श वाक्य ‘सबका साथ,सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ ने हमें रास्ता दिखाया है। एक पारदर्शी और आदर्श तरीके से जनजातीय लोगों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए आदिवासियों की इस प्रगति का एक बड़ा प्रमाण हमारी अपनी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु हैं जो आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं।श्री अर्जुन मुंडा ने यह भी कहा कि आदि महोत्सव हमारे आदिवासी पूर्वजों, विभिन्न अद्वितीय आदिवासी समुदायों की संस्कृति, उनकी टिकाऊ जीवनशैली और स्वयं आदिवासियों के योगदान का उत्सव मनाता है, जिन्होंने ग्लोबल वार्मिंग जैसी हमारी आधुनिक समस्याओं का स्वदेशी समाधान प्रदान किया है और हमारे प्राकृतिक पर्यावरण के साथ शांति और सद्भाव में रहने के महत्व पर प्रकाश डाला है।इस अवसर पर प्रधानमंत्री को कई उपहार भेंट किए गए, जिनमें लद्दाख की पश्मीना ऊन, पटचित्र पेंटिंग, छत्तीसगढ़ की ढोकरा मूर्तिकला और श्री अन्ना टोकरी शामिल हैं। प्रधानमंत्री का स्वागत त्रिपुरा की पारंपरिक पगड़ी से भी किया गया।इस अवसर पर, ऊर्जा और जीवंतता से ओतप्रोत कई नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। नृत्यांगना रानी खानम द्वारा कोरियोग्राफ की गई,नृत्य कला में असम के बागुरूम्बा, छत्तीसगढ़ के पंथी नृत्य,तेलंगाना की गुसाड़ी, मध्य प्रदेश के बैगा परधौनी, सिक्किम के तमांग सेलो, गुजरात का सिद्धि धमाल, पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छाऊ और उत्तराखंड का हरुल नृत्य (हरुल नृत्य) शामिल थे।आयोजन के बाद, जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव श्री अनिल कुमार झा ने उद्घाटन समारोह में भाग लेने वाले एनसीसी और एनएसएस के 400 उम्मीदवारों के साथ बातचीत की।आदि महोत्सव ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम, नई दिल्ली में 27 फरवरी, 2023 तक चलेगा।
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